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रायपुर में 8वीं की छात्रा ने की खुदकुशी, परिजनों ने सरस्वती शिक्षा मंदिर प्रबंधन पर लगाया प्रताड़ना का आरोप

15 अगस्त विज्ञापन

रायपुर के छत्तीसगढ़ नगर स्थित सरस्वती शिक्षा मंदिर में पढ़ने वाली 8वीं कक्षा की छात्रा आकांक्षा सेन ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। इस घटना के बाद छात्रा के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि स्कूल में छात्रा को शिक्षिका की शिकायत पर डांटा-फटकारा गया और उसे मानसिक रूप से इतना परेशान किया गया कि उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और टिकरापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

पूरा मामला शुक्रवार, 9 अक्टूबर से शुरू हुआ था। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, लंच ब्रेक के दौरान 8वीं कक्षा की चार छात्राएं खेल रही थीं। आरोप है कि इस दौरान इन छात्राओं ने स्कूल की एक शिक्षिका गंगोत्री के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। वहां मौजूद छठवीं कक्षा के कुछ बच्चों ने यह बातें सुनीं और इसकी जानकारी संबंधित शिक्षिका को दे दी। शिक्षिका की शिकायत मिलने के बाद स्कूल की प्रिंसिपल ने चारों छात्राओं को अपने कक्ष में बुलाया और उनसे इस संबंध में पूछताछ की।

स्कूल की प्रिंसिपल इंद्राणी दुबे ने बताया कि उन्होंने छात्राओं से पूछा था कि क्या उन्होंने शिक्षिका के लिए ऐसी कोई बात कही है जिससे उन्हें ठेस पहुंची हो। प्रिंसिपल के मुताबिक, उन्होंने छात्राओं को शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करने की समझाइश दी थी। उस समय छात्राएं चुप रहीं और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन बच्चों को भी बुलाया गया जिन्होंने शिकायत की थी। अंत में छात्राओं को अगले दिन अपने माता-पिता के साथ स्कूल आने के लिए कहा गया था। प्रिंसिपल ने प्रताड़ना के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बच्चों से केवल सामान्य बातचीत हुई थी।

इस मामले में पूर्व पार्षद देवेंद्र यादव ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार को स्कूल में पेरेंट्स-टीचर मीटिंग (PTM) आयोजित की गई थी, जिसमें आकांक्षा सेन के पिता भी शामिल हुए थे। हालांकि, उस दौरान स्कूल प्रबंधन ने इस विवाद या शिकायत के बारे में पिता से कोई चर्चा नहीं की। सोमवार को स्कूल में छात्राओं को फिर से बुलाया गया और उन्हें टोकते हुए कहा गया कि वे अपने माता-पिता को साथ लेकर क्यों नहीं आई हैं।

परिजनों का आरोप है कि सोमवार, 12 अक्टूबर की शाम करीब 4 बजे आकांक्षा की मां स्कूल पहुंची थीं ताकि मामले को समझा जा सके। लेकिन उन्हें स्कूल के गेट से ही वापस भेज दिया गया और प्रबंधन ने उनसे मुलाकात तक नहीं की। इस घटना से छात्रा के काफी आहत होने की आशंका जताई जा रही है। उसी शाम करीब 6:30 से 7:00 बजे के बीच आकांक्षा का शव उसके घर में फंदे पर झूलता हुआ मिला। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई।

मंगलवार को बड़ी संख्या में परिजन, स्थानीय नेता और नागरिक स्कूल के बाहर एकत्र हुए और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। पूर्व पार्षद देवेंद्र यादव ने कहा कि बच्चे इस उम्र में काफी संवेदनशील और भावुक होते हैं, ऐसे में स्कूल प्रबंधन को संवेदनशीलता के साथ मामले को सुलझाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि आकांक्षा अपनी मां से बहुत ज्यादा जुड़ी हुई थी और स्कूल के व्यवहार से वह टूट गई थी। परिजनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इस घटना में शामिल अन्य छात्राओं के परिजनों ने भी स्कूल के रवैये पर आपत्ति जताई है। एक अन्य छात्रा के अभिभावक ओमप्रकाश साहू ने बताया कि उन्हें स्कूल से फोन आया था और पत्नी के साथ स्कूल आने को कहा गया था। उन्होंने फोन पर कई बार पूछा कि आखिर मामला क्या है और बच्चों ने क्या किया है, लेकिन स्कूल की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उन्हें सिर्फ इतना कहा गया कि स्कूल आने पर ही बात होगी। जब उन्होंने घर जाकर अपनी बेटी से पूछा, तो उसने ऐसी किसी भी घटना से इनकार किया था।

आकांक्षा सेन के बारे में बताया गया कि वह पढ़ाई में काफी होनहार थी और हर कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करती थी। उसकी मौत ने उसके सहपाठियों और परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। टिकरापारा थाना पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर ली है और घटना के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्कूल में उस दिन वास्तव में क्या हुआ था और क्या छात्रा पर किसी तरह का अनुचित दबाव बनाया गया था।

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