छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का कहर: बरगा नदी उफान पर, कई गांवों का संपर्क टूटा; ग्रामीण जान जोखिम में डालकर कर रहे नदी पार
छत्तीसगढ़ के मध्य और उत्तरी हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम विभाग ने आज भी इन क्षेत्रों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे आगामी दो दिनों तक पूरे प्रदेश में मानसून के सक्रिय रहने की संभावना है। लगातार वर्षा के कारण नदी-नाले उफान पर हैं, और कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है, जिससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस बारिश का सबसे गंभीर असर सूरजपुर जिले के बिहारपुर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहाँ बरगा नदी विकराल रूप धारण कर चुकी है। नदी के उफान पर होने से आधा दर्जन से अधिक गांवों का मुख्य सड़क संपर्क टूट गया है। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी को पार करने पर मजबूर हैं। लोग अपनी बाइकें कंधों पर उठाकर पानी के तेज बहाव के बीच से गुजर रहे हैं, जो बेहद खतरनाक स्थिति है और किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
केवल सूरजपुर ही नहीं, बल्कि कोरबा जिले में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मिनीमाता बांगो बांध में जलस्तर बढ़ने के बाद हसदेव नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। इसी तरह बीजापुर जिले की छिन्नकवाली पंचायत के पांच गांवों में भी बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं व्याप्त हैं।
पिछले 24 घंटों के दौरान सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई। राजधानी रायपुर में भी आज दिनभर बादल छाए रहने, बीच-बीच में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। यहाँ अधिकतम तापमान 28°C और न्यूनतम तापमान 23°C के आसपास रहने का अनुमान है। प्रदेश में अधिकतम तापमान 26.2°C बिलासपुर और पेंड्रा रोड में, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.8°C पेंड्रा रोड में रिकॉर्ड हुआ।
हालांकि, इन भारी बारिश के बावजूद पूरे छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार अब भी सामान्य से कम बनी हुई है। 1 जून से अब तक प्रदेश में 348.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य 444.6 मिमी से 22% कम है। इसका अर्थ है कि प्रदेश अभी भी ‘सामान्य से कम वर्षा’ की श्रेणी में बना हुआ है, जिससे भविष्य में पानी की कमी की आशंका बनी हुई है, अगर यह अंतर जल्द पूरा नहीं होता है तो कृषि और पेयजल आपूर्ति पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।