नीट पेपर लीक: राहुल गांधी के समर्थन में रायपुर में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, भूपेश बघेल ने दिल्ली पुलिस पर लगाया ‘जूता चोरी’ का आरोप
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। दिल्ली में राहुल गांधी और अन्य शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेसियों ने लोकभवन के बाहर भजन-कीर्तन कर अपना विरोध दर्ज कराया, साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
बारिश के बीच भी कांग्रेस कार्यकर्ता लोकभवन परिसर के बाहर एकजुट हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और गेट तक पहुंचने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस बल के साथ उनकी धक्का-मुक्की भी हुई। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय सहित कई नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए, जिन्हें पुलिस ने रोकने की कोशिश की। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
यह प्रदर्शन दिल्ली में हुए बड़े आंदोलन का ही एक हिस्सा था, जहां नीट पेपर लीक और धांधली के खिलाफ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई दिग्गज नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे थे। इन सभी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी दिल्ली में इस प्रदर्शन का हिस्सा थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें सीनियर नेताओं के साथ बस में बैठाकर एयरपोर्ट की ओर ले जाया, और इस दौरान उनका एक जूता भी ‘ले लिया’ गया।
कांग्रेस का कहना है कि नीट परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। प्रदर्शनकारी लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पूर्व महापौर एजाज ढेबर ने छात्रों की आत्महत्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेता राकेश गुप्ता ने शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफे की अपील की, जबकि सुबोध हरितवाल ने स्पष्ट किया कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
नीट पेपर लीक मामले ने पूरे देश में छात्रों और अभिभावकों के बीच आक्रोश भर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस मामले में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर हैं। कांग्रेस देश भर में इस मुद्दे को उठा रही है और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार पर दबाव बना रही है। यह प्रदर्शन सरकार से जवाबदेही और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग करता है।

