रायगढ़ में स्वास्थ्य कर्मचारियों का हल्ला बोल: निजीकरण रोकने और लंबित मांगों को लेकर CM को ज्ञापन
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर विशाल विरोध प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले एकजुट हुए इन कर्मचारियों ने मिनी स्टेडियम से कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली और स्वास्थ्य विभाग के निजीकरण, ठेका प्रथा व आउटसोर्सिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील की, चेतावनी दी कि मांगों पर ध्यान न देने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग के निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। उनका तर्क है कि इन नीतियों से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और कर्मचारियों के भविष्य में असुरक्षा बढ़ती है। संघ ने प्रदेश भर में स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत सभी व्यक्तियों का अनिवार्य पंजीकरण करने की भी मांग रखी। उनका कहना था कि इससे प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा और फर्जी डिग्री या डिप्लोमा वाले व्यक्तियों की पहचान हो सकेगी।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पुनरीक्षित वेतनमान को तत्काल लागू करना शामिल था। ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव पहले ही शासन को भेज दिया है, लेकिन उस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। संघ ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में भी इसी मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की गई थी, जिसे सरकार के सकारात्मक आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया था। कर्मचारियों ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले यदि यह मांग पूरी नहीं हुई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही, स्वास्थ्य संस्थानों में स्वीकृत पदों के अनुसार सीधी भर्ती की मांग भी की गई, क्योंकि वर्तमान में लगभग 35 से 40 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
प्रदर्शनकारियों ने संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए “समान काम, समान वेतन” की स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। उनका कहना था कि इन कर्मचारियों को उनके काम के अनुरूप उचित मानदेय नहीं मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, जीवनदीप समिति के तहत कार्यरत कर्मचारियों के लिए भी पूरे प्रदेश में एक समान मानदेय नीति लागू करने की मांग की गई, ताकि उनका आर्थिक शोषण रोका जा सके। कर्मचारियों ने यह भी मांग की कि जिन संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवाएं लगातार ली जा रही हैं, उनके लिए नियमित पद स्वीकृत किए जाएं।
कर्मचारी संघ ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए एक ‘स्वास्थ्य आयोग’ के गठन की मांग भी रखी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए और जल्द से जल्द उचित कदम उठाए जाएं। कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने आंदोलन को और तेज़ करने के लिए बाध्य होंगे, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।


