जनपद उपाध्यक्ष का नाम गायब, जशपुर में राज्योत्सव आमंत्रण पर विवाद
छत्तीसगढ़ की स्थापना के उत्सव, राज्योत्सव को लेकर जशपुर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्योत्सव के आमंत्रण पत्र से जनपद पंचायत जशपुर की उपाध्यक्ष अर्चना कुशवाहा का नाम जानबूझकर हटा दिया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह राजनीतिक भेदभाव का स्पष्ट मामला है, क्योंकि अर्चना कुशवाहा कांग्रेस से संबंधित हैं।

यह विवाद तब सामने आया जब कांग्रेस के जशपुर ब्लॉक के पूर्व अध्यक्ष सहस्त्रांशु पाठक ने मीडिया को एक बयान जारी किया। पाठक ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन द्वारा जारी राज्योत्सव के आमंत्रण पत्र में जिला पंचायत जशपुर के अध्यक्ष सालिक साय और उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, साथ ही नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष अरविंद भगत और उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव का नाम शामिल किया गया है। इनके अलावा, जनपद पंचायत अध्यक्ष सालिक साय का नाम भी आमंत्रण में है।
सहस्त्रांशु पाठक ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन सभी महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल होने के बावजूद, केवल जनपद पंचायत उपाध्यक्ष अर्चना कुशवाहा का नाम जानबूझकर छोड़ दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने अर्चना कुशवाहा के कांग्रेस से जुड़े होने के कारण उनके नाम को निमंत्रण पत्र में शामिल नहीं किया है, जो कि एक गंभीर राजनीतिक भेदभाव है।
कांग्रेस ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि राज्योत्सव हम सभी के लिए उत्साह और गौरव का क्षण है। ऐसे में जिला प्रशासन से राजनीतिक भेदभाव की अपेक्षा नहीं की जाती है। पाठक ने जोर देकर कहा कि इस तरह के सार्वजनिक समारोहों में सभी राजनीतिक भेदभावों को दूर रखते हुए, तमाम जनप्रतिनिधियों के सम्मान का समान रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए।
कांग्रेस द्वारा जारी इस प्रेस विज्ञप्ति के बाद से शहर की राजनीतिक फिजां गरमा गई है। हालांकि, इस मामले पर न तो जिला प्रशासन की ओर से कोई सफाई दी गई है और न ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
इस आमंत्रण पत्र विवाद ने सोमवार को रणजीता स्टेडियम में होने वाले जिला स्तरीय राज्योत्सव को लेकर शहरवासियों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। इस आयोजन में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। अब सभी की निगाहें इस आयोजन पर टिकी हैं कि क्या इस राजनीतिक विवाद का कोई और असर देखने को मिलता है।



