जंगल में दबा था माओवादियों का बारूद बैंक, सुरक्षाबलों ने ध्वस्त किए 6 डंप, बीजापुर में मिली बड़ी कामयाबी

बीजापुर जिले के पीड़िया-हिरमगुंडा के जंगल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 199वीं एवं 85वीं वाहिनी तथा 202 कोबरा बटालियन ने संयुक्त अभियान चलाकर छह माओ…और पढ़ें
HighLights
- पीड़िया-हिरमगुंडा के जंगलों से 6 माओवादी डंप बरामद
- CRPF और कोबरा बटालियन का संयुक्त सर्च ऑपरेशन
- जंगलों में छिपाकर रखी IED सामग्री व डेटोनेटर बरामद
नईदुनिया प्रतिनिधि, बीजापुर। बस्तर में माओवादी हिंसा के खात्मे के बाद अब सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी चुनौती जंगलों में वर्षों से दबे बारूदी नेटवर्क को खत्म करना है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले के पीड़िया-हिरमगुंडा के जंगल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 199वीं एवं 85वीं वाहिनी तथा 202 कोबरा बटालियन ने संयुक्त अभियान चलाकर छह माओवादी डंप बरामद किए हैं।
डंपों से आईईडी बनाने में प्रयुक्त विस्फोटक सामग्री, डेटोनेटर, कॉर्डेक्स वायर, गन पाउडर, रेडियो सेट और अन्य उपकरणों सहित करीब 30 प्रकार की सामग्री जब्त की गई है।
6 माओवादी डंप बरामद
आसूचना के आधार पर 22 जुलाई को चलाए गए अभियान में जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर चरणबद्ध तरीके से सर्च ऑपरेशन संचालित किया। तलाशी के दौरान अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखे गए छह माओवादी डंप मिले। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार यह विस्फोटक सामग्री भविष्य में सुरक्षाबलों की आवाजाही वाले मार्गों पर आईईडी बिछाने और बड़े हमलों को अंजाम देने के उद्देश्य से सुरक्षित रखी गई थी।
नेटवर्क ध्वस्त करने पर ध्यान केंद्रित
हिरमगुंडा और पीड़िया का इलाका कभी माओवादियों का मजबूत आधार क्षेत्र माना जाता था। लगातार सुरक्षा अभियानों, नए सुरक्षा शिविरों और प्रशासन की बढ़ती पहुंच के कारण इस क्षेत्र में माओवादी प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अब सुरक्षा बलों का अभियान जंगलों में छिपे हथियारों और विस्फोटकों के नेटवर्क को भी पूरी तरह ध्वस्त करने पर केंद्रित है। अभियान के दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
जंगलों से निकल रहे बारूदी जखीरे
- 31 मार्च 2026 के बाद माओवादी हिंसा पर निर्णायक बढ़त मिलने के बावजूद सुरक्षा बलों के अभियान थमे नहीं हैं। अब फोकस उन हथियारों, विस्फोटकों और नकदी के डंप को खोजने पर है, जिन्हें माओवादियों ने वर्षों के संघर्ष के दौरान जंगलों में छिपाकर रखा था। पिछले चार महीनों में कई बड़ी बरामदगियां इस बात का संकेत हैं कि संगठन का सैन्य ढांचा भले कमजोर हुआ हो, लेकिन उसका लाजिस्टिक नेटवर्क अब भी जंगलों में बिखरा पड़ा है।




