दुर्ग में महिला वकील ने की थी शिकायत:रिकॉर्ड रूम में कर्मचारियों ने रख लिए थे निजी कर्मचारी, 5 की जांच — ताजा अपडेट

दुर्ग कलेक्टोरेट के रिकार्ड रुम में कर्मचारी सांठगांठ करके निजी कर्मचारियों से काम करवा रहे थे। इसका खुलासा तब हुआ जब एक महिला वकील ने कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर ने खुद रिकार्ड रूम में जाकर औचक जांच की तो यह शिकायत सही निकली। मामले में चार महिलाकर्मी और एक प्यून के खिलाफ विभागीय जांच बैठाई गई है। जांच एक ऐसी महिलाकर्मी की भी होगी जो दो दिन पहले सेवानिवृत्त हो चुकी है। इससे सेवानिवृत्त होने के बाद मिलने वाला पैसा भी रुक गया है। सिर्फ जीपीएफ और बीमा का पैसा ही दिया गया है। बाकी पैसा जांच में निर्दोष पाए जाने के बाद दिया जाएगा। वहीं बाकी तीन महिलाकर्मी और प्यून को दूसरी शाखा में पदस्थ कर दिया गया है। कलेक्टर परिसर स्थित रिकार्ड रुम को लेकर लगातार शिकायत सामने आ रही थी। इससे यह पता चल रहा था कि वहां के कर्मचारी सांठगांठ करके निजी कर्मचारियों को आर्थिक लाभ के लिए काम करवा रहे थे। निजी कर्मचारियों से ही लोगों को रिकार्ड दिया जा रहा था। निजी कर्मचारी ही रिकार्ड शाखा में रहकर सरकारी दस्तावेजों खंगालते थे। फिर रिकार्ड तैयार कर प्रार्थी को देते थे। इसकी शिकायत कई बार स्थानीय वकीलों ने की थी। डिप्टी कलेक्टर खेमलाल वर्मा ने बताया कि सभी कर्मचारियों के खिलाफ जांच चल रही है। कर्मचारियों को अपने पक्ष में गवाह प्रस्तुत करने के लिए निर्देश दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। कलेक्टर के छापे से खुलासा कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि उनके पास एक महिला वकील शिकायत लेकर पहुंची थी। इसके बाद वह वकील के साथ रिकार्ड रुम की जांच करने गए। इससे पता चला कि महिलाकर्मी सुवर्षा राव,पुष्पा वर्मा, भानूमति मरकाम और उषा यादव रिकार्ड रुम में पदस्थ है। इनके साथ प्यून बलदाऊ यादव की ड्यूटी भी रिकार्ड रुम में है। वकीलों ने इसके साथ आर्थिक अनियमितता की भी शिकायत की। बाहरी व्यक्तियों से काम जल्दी हो रहा है, वहीं सामान्य लोगों को घुमाया जा रहा है। ग्रामीणों को रिकार्ड के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाना पड़ रहा है। सभी के खिलाफ पहले प्राथमिक जांच कराई गई है। इसमें सभी पर लगे आरोप सही पाए गए। सभी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किया गया है।


