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डॉ. तीजन बाई के सम्मान में छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, पंडवानी गायिका के नाम से जाना जाएगा गनियारी का शासकीय स्कूल

15 अगस्त विज्ञापन


रायपुर में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को उनके गृहग्राम गनियारी में अंतिम श्रद्धांजलि दी।

Publish Date: Sun, 05 Jul 2026 09:08:30 PM (IST)Updated Date: Sun, 05 Jul 2026 09:08:30 PM (IST)

शिक्षा मंत्री ने दी पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि

HighLights

  1. शिक्षा मंत्री ने दी अंतिम श्रद्धांजलि
  2. गनियारी स्कूल का होगा नामकरण
  3. सरकार ने किया महत्वपूर्ण ऐलान

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात पंडवानी गायिका और पद्मविभूषण से सम्मानित लोककलाकार डॉ. तीजन बाई को राज्य सरकार ने विशेष सम्मान देने की घोषणा की है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने शनिवार को उनके गृहग्राम गनियारी पहुंचकर पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वे उनकी अंतिम यात्रा और दाह संस्कार कार्यक्रम में भी शामिल हुए।

अंतिम यात्रा में शामिल होकर दी भावभीनी श्रद्धांजलि

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने गनियारी स्थित निवास पर पहुंचकर डॉ. तीजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने अंतिम यात्रा में शामिल होकर दिवंगत लोककलाकार को अंतिम विदाई दी और दाह संस्कार कार्यक्रम तक उपस्थित रहकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों और उनके असंख्य प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें।

गनियारी के शासकीय स्कूल का होगा नामकरण

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम बदलकर “डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी” रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय महान लोककलाकार के प्रति राज्य सरकार की सच्ची श्रद्धांजलि होगा। साथ ही आने वाली पीढ़ियों को डॉ. तीजन बाई के प्रेरणादायी जीवन, संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान से निरंतर प्रेरणा मिलती रहेगी।

लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर दिलाई पहचान

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि उनका निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए रहेंगी प्रेरणास्रोत

मंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनकी कला साधना, संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच पर स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।



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