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रायपुर में वनरक्षक बनाने के नाम पर 11 लाख की ठगी, फर्जी जॉइनिंग लेटर थमाने वाला शातिर गिरफ्तार

15 अगस्त विज्ञापन


नौकरी दिलाने के नाम पर 11 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपित दीपराज गायकवाड़ को गिरफ्तार किया गया है। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 30 May 2026 08:38:45 PM (IST)Updated Date: Sat, 30 May 2026 08:38:45 PM (IST)

वनरक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 11 लाख रुपये की ठगी

HighLights

  1. वनरक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 11 लाख रुपये की ठगी
  2. आरोपित ने भरोसा दिलाने के लिए फर्जी नियुक्ति आदेश पत्र भी सौंपा
  3. फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। वन विभाग में वनरक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर 11 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपित दीपराज गायकवाड़ को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित ने बलौदाबाजार जिले के युवक को वन विभाग में सीधी भर्ती कराने का झांसा दिया और करीब एक वर्ष तक अलग-अलग किश्तों में 11 लाख रुपये वसूल लिए। विश्वास दिलाने के लिए उसने वनरक्षक पद पर नियुक्ति का फर्जी आदेश पत्र भी तैयार कर पीड़ित को सौंप दिया। जब पीड़ित ने विभाग में दस्तावेज की जांच कराई तो पूरा मामला फर्जी निकला।

क्या है पूरा मामला

पुलिस के अनुसार प्रार्थी प्रकाश कुमार ठाकुर, निवासी महामाया चौक कसडोल, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा ने थाना सरस्वती नगर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि रायपुर के सुंदर नगर निवासी दीपराज गायकवाड़ ने वर्ष 2023 में वन विभाग में निकली भर्ती का हवाला देते हुए कहा था कि 1484 पदों में से कुछ पद रिक्त हैं और उन पर विशेष प्रक्रिया के तहत सीधी भर्ती की जा रही है।

आरोपित ने खुद को प्रभावशाली बताते हुए प्रार्थी का विश्वास जीत लिया और नौकरी लगवाने के एवज में रकम की मांग की। इसके बाद 11 जून 2025 से 28 मई 2026 के बीच ऑनलाइन ट्रांसफर और नकद माध्यम से अलग-अलग किश्तों में कुल 11 लाख रुपये ले लिए।

फर्जी नियुक्ति पत्र देकर बढ़ाया भरोसा

रकम लेने के बाद आरोपित ने प्रार्थी को वन विभाग में वनरक्षक पद पर नियुक्ति का एक आदेश पत्र उपलब्ध कराया। आरोपित ने दावा किया कि चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उसकी नियुक्ति हो गई है। लंबे समय तक इंतजार के बाद जब प्रार्थी वन विभाग के कार्यालय पहुंचा और दस्तावेजों की जांच कराई, तब पता चला कि नियुक्ति आदेश पूरी तरह फर्जी और कूटरचित है। सच्चाई सामने आने पर प्रार्थी ने आरोपित से अपनी राशि वापस मांगी, लेकिन आरोपित ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।



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