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छत्तीसगढ़ में शेयर ट्रेडिंग का झांसा देकर 1.49 करोड़ की साइबर ठगी, छह आरोपी गिरफ्तार

15 अगस्त विज्ञापन


नईदुनिया प्रतिनिधि, मोहला। शेयर ट्रेडिंग में ऊंचे मुनाफे का लालच देकर 1.49 करोड़ रुपये की अंतर्राज्यीय साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह का राजफाश किया है। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर उत्तराखंड और गुजरात में दबिश देकर छह आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। जांच में ठगी का नेपाल कनेक्शन भी सामने आया है, जिसकी विस्तृत विवेचना जारी है।

शेयर ट्रेडिंग में निवेश का झांसा

अंबागढ़ चौकी निवासी प्रार्थी कुनाल अग्रवाल ने पुलिस में ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रार्थी के अनुसार नौ नवंबर से छह दिसंबर 2025 के बीच अज्ञात व्यक्तियों ने मोबाइल नंबरों के माध्यम से संपर्क कर शेयर ट्रेडिंग में निवेश का झांसा दिया। विश्वास में लेकर पंजाब नेशनल बैंक और एचडीएफसी बैंक के खातों से कुल एक करोड़ 49 लाख 50 हजार रुपये अलग-अलग खातों में डलवा लिए गए।

ठगी की रकम पहले पांच खातों में डलवाई

रिपोर्ट पर पुलिस ने जांच शुरु की। जांच में स्पष्ट हुआ कि ठगी की रकम पहले पांच विभिन्न खातों में डलवाई गई, फिर उसे अन्य खातों में ट्रांसफर कर चेक और एटीएम के जरिए निकाला गया। लोकेशन ट्रैकिंग के दौरान संदेहियों की मौजूदगी रुद्रपुर (उधमसिंह नगर, उत्तराखंड), अहमदाबाद, राजकोट और सूरत (गुजरात) में मिली।

आरोपी गिरफ्तार, कई सामान बरामद

इन्‍हें दबोचने के लिए दो विशेष टीमों रवाना की गई जिसने अलग अलग स्थानों पर रेड की। इस मामले में पुलिस ने आरोपित बैंगलोर से मनोज कुमारजी, उत्‍तराखंड से सनातन मंडल व योगेंद्र सिंह, निवासी दिनेशपुर, गुजरात निवासी युसुफ संधवानी, राहुल गुप्ता, गौतम भाई बागड़ा को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से विभिन्न बैंकों के पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, सात मोबाइल और दस सिम कार्ड जप्त किए गए। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में आरोपितों के संपर्क काठमांडू (नेपाल) के व्यक्तियों से होने के संकेत मिले हैं। गिरोह की कार्यप्रणाली, धन प्रवाह और अन्य संभावित पीड़ितों के संबंध में जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

ठगी का तरीका समझिए

ऑनलाइन निवेश ठगी में गिरोह पहले सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफार्म के जरिए संपर्क साधता है। इसके बाद फर्जी ट्रेडिंग ऐप या वेबसाइट दिखाकर शुरुआती मुनाफा प्रदर्शित किया जाता है, जिससे पीड़ित का भरोसा बढ़े। जब बड़ी रकम निवेश होती है, तो निकासी के नाम पर टैक्स या प्रोसेसिंग शुल्क मांगा जाता है। कई मामलों में रकम अलग-अलग खातों में घुमाकर चेक या एटीएम से निकाली जाती है, ताकि ट्रैकिंग कठिन हो। विशेषज्ञों के अनुसार अनजान प्लेटफार्म, गारंटीड रिटर्न और जल्दबाजी के दबाव जैसे संकेतों पर सतर्क रहना जरूरी है।

जांच में तकनीक की अहम भूमिका

साइबर ठगी के मामलों में तकनीकी विश्लेषण निर्णायक साबित हो रहा है। आई4सी पोर्टल, काल डिटेल रिकार्ड, बैंकिंग ट्रांजेक्शन ट्रेल और लोकेशन डेटा के जरिए पुलिस धन प्रवाह और संदिग्ध गतिविधियों को जोड़ती है। इस प्रकरण में भी खातों के बीच ट्रांसफर पैटर्न और निकासी के तरीके से गिरोह तक पहुंच बनाई गई।

यह भी पढ़ें- Chhattisgarh Budget 2026- 27: विधानसभा का बजट सत्र शुरू, राज्यपाल ने कहा- ‘राज्य में विकास की असीम संभावना’



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