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विशेष लेख: छत्तीसगढ़ की शक्तिपीठ परियोजना

15 अगस्त विज्ञापन

 

पांच प्रमुख शक्तिपीठों का होगा विकास

धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क रायपुर

पर्यटन एक ऐसी यात्रा या भ्रमण है, जो मनोरंजन या फुर्सत के क्षणों का आनंद उठाने के उद्देश्य से किया जाता है। अतिथि देवो भवः भारतीय परंपरा प्राचीन काल से रही है। छत्तीसगढ़ में लगभग 138 स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के आधार पर पर्यटन स्थल के रूप में प्राथमिकता दी गई है, जिसमें 58 स्मारकों को 11 अभ्यारण 03 राष्ट्रीय उद्यान को संरक्षित घोषित किया गया है। पर्यटन मानव की प्राचीन एवं मौलिक प्रवृत्ति है। पर्यटन धरातलीय तथा मानवीय विभिन्नताओं विविधताओं का अवलोकन कर ज्ञान की बढ़ोतरी एवं मनोरंजन करता है। छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का एक प्रमुख गंतव्य है। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर ने इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने उत्तराखंड के चार धाम की तर्ज पर राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने के लिए शक्तिपीठ परियोजना की शुरुआत की है। इस परियोजना के तहत लगभग 1,000 किलोमीटर लंबे आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शक्तिपीठों एवं महत्वपूर्ण पूजा स्थलों का विकास, सौंदर्याकरण तथा आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्ग, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, विश्राम स्थल एवं सुरक्षा व्यवस्था जैसी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

छत्तीसगढ़ आस्था पथ (शक्तिपीठ भ्रमण) योजना प्रारंभ करने जा रहे हैं, जिसमें पांचों शक्तिपीठों का भ्रमण एवं दर्शन कराया जाएगा, इसके लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में 5 करोड़ का प्रावधान किया है। प्रदेश के पांच शक्तिपीठों कुदरगढ़, डोगरगढ़, रतनपुर, चन्द्रपुर एवं दंतेवाड़ा को शक्तिपीठ सर्किट के रूप में विकसित करने के लिए बजटीय प्रावधान किया है। इस परियोजना के तहत रतनपुर स्थित मां महामाया, चंद्रपुर की मां चंद्रहासनी, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी और सूरजपुर के कुदरगढ़ मंदिर को एक धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जाना था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सरकार गठन के बाद बजट में इसके लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था, जिससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद थी। इन पाँचों शक्तिपीठों को बेहतर सड़कों, यात्री सुविधाओं, विश्राम स्थलों और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ना। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और जिला प्रशासन द्वारा इन मंदिरों में सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का काम तेजी से किया जा रहा है।

केंद्र सरकार की प्रसाद (PRASHAD)योजना के तहत छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले स्थित माँ महामाया मंदिर, रतनपुर के समग्र विकास के लिए 200 करोड़ की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसे केन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय को प्रेषित की गई है। उक्त कार्य योजना को स्वीकृति मिलते ही एंजेसी तय कर कार्य प्रारंभ की जाएगी। यह मंदिर 11वीं-12वीं शताब्दी के दौरान कलचुरी राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा बनवाया गया था और यह माँ महालक्ष्मी एवं माँ महासरस्वती को समर्पित है। यह दक्षिण कोशल क्षेत्र की आराध्य देवी और रतनपुर राज्य की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं। इसके अलावा डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा की शक्तिपीठों के लिए सीपीआर तैयार करने प्रक्रियाधीन है।

प्रसाद योजना के तहत केंद्र सरकार ने प्रथम चरण में देश के 26 धार्मिक तीर्थ स्थलों का चयन किया है। इन्हें पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा रहा है ताकि देश-विदेश के पर्यटक यहां पहुंच सकें। पर्यटन को बढ़ावा मिले। इन स्थलों की प्रसिद्धी का विस्तार हो। हमारे प्रमुख देवी तीर्थ स्थल महामाया मंदिर और दंतेश्वरी मंदिर को प्रसाद योजना में शामिल करवाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाकर केंद्र सरकार को भेजा गया है।

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