बच्चों में मानसिक तनाव के संकेत पहचानने शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण, रायपुर में यूनिसेफ की पहल

बच्चों में मानसिक तनाव के संकेतों को पहचानने और उनकी भावनात्मक आवश्यकताओं को समझने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम रायपुर में 28 से 30 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें शिक्षा विभाग के समग्र शिक्षा अभियान और यूनिसेफ मिलकर शिक्षकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक समस्याओं की पहचान करने के तरीके सिखाना है। इसमें बस्तर संभाग के सात जिलों और धमतरी जिले के चयनित शिक्षक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद, ये प्रशिक्षित शिक्षक अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को भी इसी विषय पर प्रशिक्षित करेंगे, जिससे यह पहल व्यापक रूप ले सके।
प्रशिक्षण सत्रों में बच्चों की भावनात्मक स्थिति को समझने, कक्षा में एक सुरक्षित और सहायक माहौल बनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर बच्चों को उचित सहायता और परामर्श से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका लक्ष्य शिक्षकों को बच्चों की मानसिक और भावनात्मक परेशानियों को समय रहते समझने और उनका समाधान करने में सक्षम बनाना है।
इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, समग्र शिक्षा के उप संचालक कौशिक ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। डॉक्टर या इंजीनियर बनने की चाह और पढ़ाई से जुड़ी अपेक्षाओं के कारण बच्चों पर अनावश्यक दबाव रहता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह आवश्यक है कि बच्चे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार भविष्य का चुनाव कर सकें और उन पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव न हो।
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ फील्ड ऑफिस की प्रमुख सीमा कुमार ने भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को स्कूल में सुरक्षित और सम्मानित महसूस होना चाहिए। सीमा कुमार ने यह भी बताया कि स्कूल, परिवार और समुदाय के बीच सहयोग से बच्चों को बेहतर मानसिक और मनोसामाजिक समर्थन मिल सकता है। उन्होंने बच्चों में सुरक्षा, पहचान और अपनेपन की भावना विकसित करने में मातृभाषा की भूमिका को भी रेखांकित किया।
यूनिसेफ के शिक्षा विशेषज्ञ रवि राज दयाल ने इस प्रशिक्षण के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि बच्चों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने के साथ-साथ उनके मानसिक और भावनात्मक कल्याण पर भी ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने से स्कूलों को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और सहयोगपूर्ण बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वे स्वस्थ मानसिक स्थिति के साथ अपनी शिक्षा पूरी कर सकें और भविष्य के लिए तैयार हो सकें।




