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तालाबों का हेल्थ कार्ड:हर 5 में एक तालाब बीमार, प्लास्टिक और रासायनिक खाद बना रही पानी को जहरीला

15 अगस्त विज्ञापन

छत्तीसगढ़ में पहली बार तालाबों का हेल्थ कार्ड बनाने के लिए हो रही वैज्ञानिक जांच में चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आ रही है। प्रदेश के सभी 33 जिलों के पांच-पांच तालाबों की जांच में अब तक आधे से ज्यादा तालाबों का हेल्थ कार्ड तैयार हो चुका है। शुरुआती रिपोर्ट में करीब 20 फीसदी तालाबों की सेहत बिगड़ी हुई मिली है। तालाबों के पानी को प्लास्टिक कचरा और खेतों से बहकर आने वाले रासायनिक उर्वरक दूषित और जहरीला कर रहे हैं। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर अब दूषित और जहरीले पानी वाले तालाबों के सुधार की कार्ययोजना बनाई जाएगी। जिन तालाबों की सेहत यानी उनका पानी शुद्ध है उन्हें अधिसूचित किया जाएगा। उसके बाद उन तालाबों में वेटलैंड नियम लागू होगा। तालाबों की बाउंड्री से 50 मीटर के दायरे में आने वाले सभी तरह के निर्माण को अवैध घोषित कर तोड़ा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य जैव विविधता बोर्ड प्रदेशभर के तालाबों का हेल्थ कार्ड तैयार कर रहा है। इसके लिए 2.25 हेक्टेयर से अधिक की हर वाटरबॉडी के पानी जांच की जा रही है। प्रारंभिक चरण में हर जिले के पांच-पांच तालाबों को चुना गया है। इन तालाबों के पानी की वैज्ञानिक जांच की जा रही है। जांच से पता चलने लगा कि किस तालाब या वाटरबॉडी का पानी कितना स्वच्छ है? दूषित है तो क्यों और उसमें कौन-कौन से हानिकारक तत्व मौजूद हैं। अब तक तैयार हुई रिपोर्टों में करीब 20 फीसदी तालाबों में प्रदूषण मिला हैं। जांच में सामने आया है कि कई तालाबों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कचरा जमा रहता है। इसके अलावा खेतों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक उर्वरक वाला पानी भी बहकर तालाबों में घुल रहा है। किस जांच से पता लगाया जा रहा निगम क्षेत्र के तालाब अभी जांच के दायरे से बाहर नगर निगम सीमा के भीतर आने वाले तालाबों का हेल्थ कार्ड फिलहाल नहीं बनाया जा रहा है। जैव विविधता बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार पहले नगर निगम से एनओसी ली जाएगी, उसके बाद ही इन तालाबों की जांच शुरू होगी। जानकारों का कहना है कि निगम क्षेत्र के कई तालाबों के आसपास पहले से बड़े निर्माण हैं। ऐसे में एनओसी मिलने को लेकर संशय बना हुआ है। हर साल हर जिले के 5-5 तालाबों की होगी जांच बायोडावर्सिटी बोर्ड ने अभी जो प्लान बनाया है उसके अनुसार फिलहाल हर साल 5-5 तालाबों के पानी की जांच की जाएगी। इसके लिए अभी 3-3 लाख का बजट स्वीकृत किया गया है। बताया गया है कि आने वाले वर्षों में तालाबों की संख्या बढ़ाई जाएगी। यानी हर जिले के 10-10 तालाबों के पानी की जांच की जाएगी। तालाबों की सुरक्षा बढ़ेगी ये प्रक्रिया तालाबों की सुरक्षा के लिए अहम कदम है। जांच रिपोर्ट के आधार पर तालाबों को अधिसूचित किया जाएगा। उसके बाद तालाब पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएंगे। उनके आस-पास अवैध निर्माण नहीं होंगे।
अमिताभ वाजपेयी, सदस्य सचिव बायो डायवर्सिटी बोर्ड

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