बिलासपुर में रिश्वत लेते पटवारी का वीडियो वायरल, कलेक्टर ने किया निलंबित

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रशासन ने एक पटवारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। पटवारी पर 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगने और उसे स्वीकार करने का गंभीर आरोप लगा है, जिसके बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया और समाचार पोर्टलों पर रिश्वत लेते हुए वीडियो प्रसारित होने और प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद की गई है।
मामला शासकीय राजस्व कार्य के एवज में कथित तौर पर रिश्वत लेने से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने किसी राजस्व संबंधी कार्य के लिए 25 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की और उसे लिया भी। इस घटना का एक वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया।
वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया। तहसीलदार पचपेड़ी को इस मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया। जांच के बाद, तहसीलदार पचपेड़ी ने 28 अक्टूबर 2026 को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें पटवारी के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही जिला प्रशासन ने निलंबन का आदेश जारी किया।
प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक, निलंबित पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी पहले पटवारी हल्का नंबर 14 में पदस्थ थे। वर्तमान में उनकी तैनाती तहसील पचपेड़ी के पटवारी हल्का नंबर 5 में थी। उनके इस कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों के विपरीत माना गया है, जिसे गंभीर कदाचरण की श्रेणी में रखा गया है।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस मामले में आगे की कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने तहसीलदार पचपेड़ी को संबंधित पटवारी ऋषिपुरी गोस्वामी के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर सात दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह कदम विभागीय जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान, पटवारी गोस्वामी का मुख्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, कोटा कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि निलंबन के दौरान भी उन्हें आवश्यक वित्तीय सहायता मिलती रहे।
वीडियो से जुड़े इस मामले में प्रशासन द्वारा की गई यह कार्रवाई राजस्व विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, यह निलंबन की कार्रवाई विभागीय प्रक्रिया का एक हिस्सा है और मामले की विस्तृत जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।




