छत्तीसगढ़

तालाब सफाई अभियान पर सवाल या सियासत? विकास कार्यों में रोड़ा डालने वालों पर उठे सवाल

नगर में वर्षों बाद तेज रफ्तार से चल रहे सफाई अभियान पर कुछ लोगों की बयानबाजी से गरमाई राजनीति

15 अगस्त विज्ञापन

( गौरी शंकर गुप्ता ) रायगढ़/घरघोड़ा। नगर पंचायत क्षेत्र में तालाबों से जलकुंभी हटाने और सफाई कार्य को लेकर जारी विवाद अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। जहां एक ओर नगर में तालाबों की सफाई और जल संरक्षण के लिए अभियान तेज गति से चल रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों द्वारा लगातार सवाल उठाने को लेकर आम लोगों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर हर विकास कार्य में विरोध की राजनीति क्यों?

*हर काम में अड़ंगा डालने की पुरानी आदत?*

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में जब भी कोई बड़ा काम शुरू होता है, कुछ चेहरे हर बार विरोध और आरोपों के साथ सामने आ जाते हैं। समर्थकों का आरोप है कि यह वही लोग हैं जो विकास कार्यों में सहयोग देने के बजाय हर बार मीन-मेख निकालकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। उनका कहना है कि आलोचना करना आसान है, लेकिन जमीन पर काम कराना मुश्किल।

*तालाब सफाई अभियान को मिल रहा जनसमर्थन*

नगर पंचायत समर्थकों का दावा है कि तालाबों से जलकुंभी हटाने का काम लगातार जारी है और इसका फायदा आने वाले समय में जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण को मिलेगा। कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से उपेक्षित पड़े तालाबों में अब काम दिखाई दे रहा है और इसी वजह से कुछ लोगों को यह रास नहीं आ रहा।

*आरोपों के पीछे राजनीति या निजी एजेंडा?*

नगर सरकार के पक्ष में खड़े लोगों का कहना है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया और समाचारों के जरिए जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिससे विकास कार्यों पर सवाल खड़े हों और नगर पंचायत की छवि प्रभावित हो। समर्थकों का आरोप है कि यदि वास्तव में जनहित चिंता होती तो सुझाव और समाधान दिए जाते, केवल विरोध नहीं।

*जमीन पर काम बनाम बयानबाजी की लड़ाई*

स्थानीय जनप्रतिनिधियों से जुड़े लोगों का कहना है कि नगर में सफाई, जल संरक्षण और सौंदर्यीकरण जैसे काम पहली बार इतने व्यापक स्तर पर चल रहे हैं। ऐसे समय में लगातार विवाद खड़ा करना केवल काम की गति प्रभावित करता है। उनका कहना है कि जनता अब केवल आरोप नहीं, परिणाम देख रही है।

*जनता तय करेगी कौन सही, कौन केवल विघ्नसंतोषी*

फिलहाल तालाब सफाई को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन आने वाले समय में साफ तालाब, बेहतर जल संरक्षण और जमीनी परिणाम ही तय करेंगे कि कौन नगरहित में काम कर रहा था और कौन केवल विवाद खड़ा करने में व्यस्त था।

15 अगस्त विज्ञापन
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