
गौरीशंकर गुप्ता/रायगढ़/लैलूंगा| लैलूंगा तहसील में आदिवासी भूमि के कथित अवैध नामांतरण और बेनामी खरीदी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर प्रकरण को लेकर शिकायतकर्ताओं ने बिलासपुर संभाग के आयुक्त (राजस्व) तथा मुख्य सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को विधिवत आवेदन पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर पंचायत लैलूंगा क्षेत्र की एक नि:संतान आदिवासी की भूमि को वैध उत्तराधिकारियों की अनदेखी करते हुए फर्जी तरीके से नामांतरित कर दिया गया। बताया गया है कि मृतक के करीब 14 वैध वारिस मौजूद हैं, इसके बावजूद बिना किसी जांच, पंचायत सत्यापन या सार्वजनिक इश्तहार के एक व्यक्ति को वारिस मानकर आदेश पारित कर दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई गई है कि एक ही प्रकरण में 9 अप्रैल 2025 और 15 अप्रैल 2025 को दो अलग-अलग आदेश जारी किए गए, जिससे तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नामांतरण के तुरंत बाद भूमि की रजिस्ट्री कराकर पूरे मामले को अंजाम दिया गया।
शिकायतकर्ताओं ने आवेदन में तहसीलदार सहित संबंधित राजस्व कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच, नामांतरण व रजिस्ट्री निरस्त करने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले की जानकारी उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है।
इधर, आदिवासी समाज में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है और जल्द ही तहसील कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आदिवासी भूमि हड़पने का यह संगठित खेल और भी मजबूत हो जाएगा।



