सरगुजा में संदिग्ध हत्या: युवक का शव कब्र से निकाला गया, परिवार ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप


छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में महामाया पहाड़ पर मिले क्षत-विक्षत शव की पहचान शुभम कश्यप (33) के रूप में हुई है। पहले अज्ञात शव को दफना दिया गया था, लेकिन पहचान होने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कब्र खोदकर शव को बाहर निकाला गया। शुभम के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसकी हत्या करके शव को फंदे से लटकाया गया था। उन्होंने पुलिस पर गुमशुदगी की जांच में लापरवाही बरतने और बदसलूकी करने का भी आरोप लगाया है। परिवार ने फिरौती के लिए मैसेज आने की बात भी कही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में महामाया पहाड़ पर हाल ही में मिले एक क्षत-विक्षत शव ने इलाके में सनसनी फैला दी है। शुरुआती जांच में शव की पहचान न होने के कारण उसे दफना दिया गया था। हालांकि, अब इस शव की पहचान जयस्तंभ चौक के पास मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाले शुभम कश्यप (33) के रूप में हुई है। पहचान होने के बाद सोमवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कब्र खोदकर शव को बाहर निकाला गया और परिजनों को सौंपा गया।
शुभम के परिवार ने इस पूरे मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि शुभम की हत्या की गई और फिर शव को फांसी पर लटका दिया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने शुभम की गुमशुदगी की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और उनके साथ बदसलूकी भी की।
पूरा मामला तब सामने आया जब शनिवार को महामाया पहाड़ स्थित सागौन नर्सरी में एक क्षत-विक्षत शव मिला। मौके पर साड़ी और महिलाओं की चप्पल मिलने के कारण पुलिस ने शुरुआत में इसे युवती का शव माना था। हालांकि, फॉरेंसिक जांच और पोस्टमॉर्टम के बाद यह स्पष्ट हुआ कि शव एक युवक का है। शव के साथ मिले सामान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रविवार शाम शुभम कश्यप के रिश्तेदार कोतवाली थाने पहुंचे। चप्पल और कपड़ों के आधार पर उन्होंने शव की पहचान की।
परिजनों के अनुसार, शुभम की गुमशुदगी की रिपोर्ट 11 जुलाई को कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने उसकी तलाश में कोई गंभीरता नहीं दिखाई और न ही शव मिलने की जानकारी परिवार को दी। परिवार का यह भी दावा है कि शुभम नशे का आदी था। 10 जुलाई को नशे की हालत में घर पहुंचने पर हुए विवाद के बाद परिवार उसे कोतवाली थाने ले गया था। वहां से वह मामा के घर चला गया और 11 जुलाई को घर वापस आकर कुछ सामान लेकर निकल गया, जिसके बाद वह लौटा नहीं।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि शुभम की मां के मोबाइल पर तीन दिन पहले एक मैसेज आया था, जिसमें लिखा था कि शुभम एक लड़की के पास है और उसे वापस लाने के लिए 1 लाख रुपए की व्यवस्था करनी होगी। परिवार का कहना है कि उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दी, लेकिन पुलिस ने इसे फर्जी बताकर कोई गंभीर जांच नहीं की। उनका यह भी आरोप है कि शुभम का मोबाइल और पर्स अभी तक बरामद नहीं हुआ है।
रविवार को पहचान के लिए थाने पहुंचे रिश्तेदारों ने यह भी आरोप लगाया कि वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें बाहर जाने के लिए कहा। इस मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी थाने पहुंचकर नाराजगी व्यक्त की थी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




