‘समानता का नया दौर’: साय कैबिनेट ने UCC बिल को दी हरी झंडी
'समानता का नया दौर': साय कैबिनेट ने UCC बिल को दी हरी झंडी

गौरीशंकर गुप्ता / रायपुर : छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठन को मंजूरी दे दी। रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाली यह समिति विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानूनों को एकसमान करने का प्रारूप बनाएगी।
कैबिनेट बैठक के प्रमुख फैसले
मंत्रालय महानदी भवन में हुई बैठक में UCC प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी मिली। संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाने का लक्ष्य है। समिति जनता, संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव लेगी, जिससे धार्मिक-लैंगिक समानता सुनिश्चित हो। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं को विवाह, संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार मिलेंगे।
UCC का मतलब और प्रभाव
UCC से हिंदू विवाह अधिनियम, मुस्लिम पर्सनल लॉ और अन्य धर्म-आधारित कानून एक समान कोड में बदल जाएंगे। छत्तीसगढ़ पहला ऐसा राज्य बनने की तैयारी में है जहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप UCC बनेगा। उत्तराखंड के बाद यह दूसरा बड़ा कदम होगा, लेकिन आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में जनजातीय रीति-रिवाजों को छूट मिल सकती है।
बीजेपी सरकार ने चुनावी वादे को पूरा करते हुए यह फैसला लिया। विपक्ष कांग्रेस ने इसे ध्रुवीकरण का हथियार बताया, जबकि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ का हवाला दे रही है। समिति के गठन से पहले व्यापक परामर्श होगा, ताकि विवाद कम हो। अंबिकापुर-सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कैबिनेट ने महिलाओं को जमीन रजिस्ट्री पर 50% छूट, सैनिकों-पशुपालकों के लिए नई योजनाएं भी मंजूर कीं। स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव भी पास हुआ। ये फैसले राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदल सकते हैं।
समिति 6-9 महीने में ड्राफ्ट सौंपेगी, उसके बाद विधानसभा में बिल पेश होगा। सरकार का दावा है कि UCC समानता का प्रतीक बनेगा। छत्तीसगढ़ मॉडल अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बनेगा। यह कदम सामाजिक न्याय और एकता को मजबूत करेगा।




