छत्तीसगढ़टॉप न्यूज़राज्य

सेवा की कहानी: खाद्यान्न सहायता से सरिता के परिवार का घटा राशन खर्च, मजदूरी की कमाई में होने लगी बचत

15 अगस्त विज्ञापन

सेवा संकल्प अभियान

छह सदस्यीय परिवार को नियमित मिल रहा चावल, चना और शक्कर, रोजमर्रा की खाद्यान्न जरूरतों को मिला सहारा

पहले मजदूरी की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन खरीदने में होता था खर्च, अब बची राशि से पूरी हो रहीं परिवार की दूसरी जरूरतें

रायपुर,  सितम्बर 2026/ रोज की मजदूरी से होने वाली सीमित आमदनी में जब परिवार के राशन पर ही बड़ा हिस्सा खर्च हो जाए, तो दूसरी जरूरतों के लिए पैसे बचा पाना मुश्किल होता है। सरगुजा जिले के ग्राम सकालो चारपारा निवासी श्रीमती सरिता पात्र के छह सदस्यीय परिवार की भी पहले यही स्थिति थी। मजदूरी से मिलने वाली राशि से चावल, तेल, नमक, शक्कर सहित रोजमर्रा की खाद्य सामग्री खरीदनी पड़ती थी। अब खाद्यान्न सहायता के तहत नियमित राशन मिलने से परिवार के भोजन की जरूरत पूरी होने के साथ मजदूरी की कमाई में कुछ राशि बचने लगी है।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए सरिता बताती हैं कि उनके परिवार में छह सदस्य हैं। परिवार को राशन दुकान से चावल, चना और शक्कर जैसी खाद्य सामग्री मिल रही है। इससे घर की नियमित खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है और घरेलू बजट पर पड़ने वाला बोझ भी कम हुआ है।

पहले राशन खरीदने में खर्च हो जाती थी मजदूरी की कमाई

सरिता बताती हैं कि परिवार मजदूरी कर अपनी आजीविका चलाता है। पहले मजदूरी से मिलने वाली राशि से ही चावल सहित अन्य खाद्य सामग्री खरीदनी पड़ती थी। सीमित आय में राशन खरीदने के बाद परिवार की अन्य आवश्यकताओं के लिए पैसे बचा पाना मुश्किल होता था।

अब चावल, चना और शक्कर जैसी खाद्य सामग्री राशन के माध्यम से मिलने से इन पर होने वाला खर्च कम हुआ है। इससे मजदूरी की कमाई में कुछ राशि बचने लगी है, जिसका उपयोग परिवार की दूसरी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है।

छह सदस्यीय परिवार के घरेलू बजट को मिला सहारा

सरिता अपने परिवार में आए बदलाव को साझा करते हुए कहती हैं, “पहले मजदूरी करते थे और उसी पैसे से चावल, तेल, नमक, शक्कर खरीदते थे। पैसे की बचत नहीं हो पाती थी। अब चावल, शक्कर और चना मिलने से थोड़ा पैसा बचने लगा है।”

नियमित राशन मिलने से छह सदस्यीय परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था आसान हुई है। खाद्यान्न पर होने वाले नियमित खर्च में कमी आने से सीमित आय में परिवार की दूसरी जरूरतों के लिए भी राशि उपलब्ध हो पा रही है।

राशन की चिंता हुई कम, दूसरी जरूरतों पर दे पा रहे ध्यान

सरिता ने खाद्यान्न सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि राशन की सुविधा से उनके जैसे मजदूरी करने वाले परिवारों को रोजमर्रा की खाद्यान्न जरूरतें पूरी करने में सहयोग मिल रहा है और मेहनत की कमाई में कुछ बचत भी संभव हो पा रही है।

सरिता के परिवार की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि खाद्यान्न सहायता भोजन की जरूरत पूरी करने के साथ सीमित आय वाले परिवारों के घरेलू बजट को भी सहारा दे रही है। राशन पर होने वाला खर्च कम होने से मजदूरी की कमाई का कुछ हिस्सा परिवार की दूसरी आवश्यकताओं के लिए बच रहा है।

15 अगस्त विज्ञापन
विज्ञापन 1
विज्ञापन 2
विज्ञापन 3
विज्ञापन 4
विज्ञापन 5
विज्ञापन 6
विज्ञापन 7
विज्ञापन 8

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!