Uncategorized

राग और आकर्षण ही दुखों का मूल कारण: भव्य मुनि

15 अगस्त विज्ञापन

नवापारा-राजिम| श्वेताम्बर जैन मंदिर में चातुर्मासिक प्रवचन हुआ। भव्य मुनि ने उपमिती भव प्रपंचा ग्रंथ की विवेचना की। मुनि ने कहा, मनुष्य संसार की मोह-माया, तृष्णा में उलझता है। आत्मकल्याण का मार्ग भूल जाता है। मुनि ने कहा, राग, आकर्षण ही दुखों का कारण हैं। संसार के प्रति वैराग्य की भावना पैदा होती है। तभी मोक्ष की दिशा में पहला कदम पड़ता है। मुनि ने कहा, दुर्लभ मानव जीवन मिलता है। जिनशासन भी मिलता है। फिर भी मनुष्य इंद्रियों के वश में रहता है। आत्मस्वरूप नहीं पहचान पाता। जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मज्ञान पाना है। संसार की असारता समझना है। मुक्ति का मार्ग अपनाना है। प्रवचन से प्रेरित होकर जैन समाज में आयंबिल, एकांतर तप की साधना निरंतर जारी है। चातुर्मास के प्रथम अठाई के आठ उपवास का तप अनमोल बैद ने किया। अंजली बैद के चार उपवास पूर्ण हुए। उपस्थित श्रद्धालुओं ने तपस्वियों की अनुमोदना की।

15 अगस्त विज्ञापन
विज्ञापन 1
विज्ञापन 2
विज्ञापन 3
विज्ञापन 4
विज्ञापन 5
विज्ञापन 6
विज्ञापन 7
विज्ञापन 8

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!