बोधराजपदर जंगल से नक्सली डंप मिला राइफल समेत 49 कारतूस जब्त किया
बस्तर में नक्सली हिंसा की घटनाएं भले कम हुई हों, जंगलों में छिपाए हथियार सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए हैं। लगातार आत्मसमर्पण हो रहे हैं। सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ा है। नक्सलियों के गुप्त डंप एक-एक कर सामने आ रहे हैं। सुकमा के भेज्जी थाना क्षेत्र के बोधराजपदर जंगल से सीआरपीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बोल्ट-एक्शन राइफल समेत 49 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बरामदगी से संकेत मिला है कि जंगलों में अब भी हथियारों का जखीरा छिपा हो सकता है। 3 अगस्त को सीआरपीएफ की 50वीं बटालियन की ई-कंपनी और भेज्जी पुलिस ने बोधराजपदर जंगल में संयुक्त अभियान चलाया। अभियान डीआईजी ऑप्स कोंटा राजेश पाण्डेय के मार्गदर्शन में हुआ। 50वीं वाहिनी के सेनानी प्रेमजीत कुमार ने भी मार्गदर्शन किया। एफओबी एलारमडगु से निकली टीम ने करीब 2.8 किलोमीटर भीतर जंगल में सर्च किया। जमीन में छिपाकर रखा नक्सली डंप मिला। डंप से .315 बोर की एक बोल्ट-एक्शन राइफल मिली। 7.62×39 मिमी के 47 जिंदा कारतूस मिले। 7.62×51 मिमी के दो जिंदा कारतूस मिले। एक एल्युमिनियम कंटेनर भी जब्त किया गया। कार्रवाई के बाद टीम सुरक्षित कैंप लौट आई। पुलिस ने कहा है कि इलाके में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा। ग्रामीणों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत देने की अपील की गई है। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। नक्सलियों के कमजोर पड़ने और बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण के बाद भी जंगलों में सर्च ऑपरेशन की रफ्तार कम नहीं हुई है। बस्तर के सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जैसे संवेदनशील इलाकों में सीआरपीएफ, डीआरजी, एसटीएफ, जिला पुलिस की संयुक्त टीमें नियमित ऑपरेशन चला रही हैं। मकसद नक्सल गतिविधियों पर नजर रखना है। वर्षों से छिपाए हथियार, विस्फोटक, अन्य सामग्री बरामद करना भी लक्ष्य है। लगातार सफलताओं से नक्सल नेटवर्क कमजोर हो रहा है। बस्तर में सैकड़ों नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बावजूद हथियारों की बरामदगी जारी है। नक्सली आतंक से परेशान ग्रामीण अब सरेंडर के बाद जंगल में छिपाए हथियारों की सूचना पुलिस को दे रहे हैं।




