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पढ़ाने के साथ आवारा कुत्तों पर भी नजर रखेंगे स्कूल टीचर, छत्तीसगढ़ में अनोखा सरकारी आदेश, मचा बवाल

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CG News: छत्तीसगढ़ में अब शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों के आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों पर भी नजर रखेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों के जेडी और डीईओ को आदेश जारी कर प्रत्येक स्कूल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं।

Publish Date: Sun, 23 Nov 2025 10:05:22 PM (IST)

Updated Date: Sun, 23 Nov 2025 10:05:22 PM (IST)

आवारा कुत्तों पर भी नजर रखेंगे स्कूल टीचर। (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. आवारा कुत्तों पर भी नजर रखेंगे स्कूल टीचर
  2. छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने जारी किया निर्देश
  3. निर्देश के जारी होते ही शिक्षकों में नाराजगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बालोद। प्रदेश में अब शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों के आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों पर भी नजर रखेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों के जेडी और डीईओ को आदेश जारी कर प्रत्येक स्कूल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं।

आदेश के अनुसार, शिक्षकों को स्कूल परिसर या उसके आसपास विचरण कर रहे आवारा कुत्तों की जानकारी ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम के डाग कैचर को देनी होगी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन की मदद से स्कूल में कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस निर्देश के जारी होते ही शिक्षकों में नाराजगी फैल गई है।

टीचर्स एसोसिएशन ने जताया इसका विरोध

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन जिला इकाई ने आदेश को अव्यावहारिक और शिक्षकीय गरिमा के विरुद्ध बताया है। जिला अध्यक्ष दिलीप साहू, प्रदेश संगठन सचिव बीरबल देशमुख, जिला संयोजक रामकिशोर खरांशु, कामता प्रसाद साहू, शिव शांडिल्य, वीरेन्द्र देवांगन, नीलेश देशमुख, पवन जोशी, कांतु राम चंदेल, जिला सचिव नरेंद्र साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से विरोध दर्ज कराया है।

कुत्तों की निगरानी जैसी जिम्मेदारी देना अनुचित

उनका कहना है कि शिक्षकों पर पहले से ही कई गैर-शिक्षकीय कार्यों का बोझ है, ऐसे में आवारा कुत्तों की निगरानी जैसी जिम्मेदारी देना अनुचित है। एसोसिएशन का तर्क है कि कुत्तों की निगरानी व नियंत्रण स्थानीय प्रशासन का काम है, जिसे शिक्षकों पर थोपना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षण कार्य पहले ही बाधित हो रहा है और इस तरह की अतिरिक्त जिम्मेदारियां शिक्षक समुदाय की कार्य क्षमता को प्रभावित करती हैं।

यह भी पढ़ें- माओवादी हुए कन्फ्यूज्ड…. आखिरकार कहां करे आत्मसमर्पण, बारसे देवा क्यों नहीं कर पा रहा सरेंडर?

आदेश को वापस नहीं लिया तो होगा आंदोलन

संगठन ने आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यह निर्णय न तो व्यावहारिक है और न ही शिक्षा के हित में। इधर, आदेश लागू होने के बाद जिला स्तर पर प्रशासनिक तैयारी शुरू कर दी गई है, जिसके तहत नोडल अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है। वहीं, शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश को वापस नहीं लिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।



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