महादेव ऐप प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की राह खुली, ओमान कोर्ट ने UAE की मांग ठुकराई

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में भारत को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। ओमान की मस्कट कोर्ट ऑफ अपील ने 8 अक्टूबर 2026 को इस बहुचर्चित प्रत्यर्पण मामले में भारत के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने भारत की प्रत्यर्पण याचिका को स्वीकार कर लिया, जबकि UAE की मांग को खारिज कर दिया। इस दौरान सौरभ चंद्राकर ने खुद को भारतीय नागरिक न बताकर वानुअतु का नागरिक होने का दावा किया था, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
भारत और UAE दोनों ने ओमान की अदालत में सौरभ चंद्राकर की हिरासत की मांग की थी। UAE उसे दुबई में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में चाहता था, जिसका आपराधिक केस नंबर 18483/2026 था। इस मामले में उस पर मनी लॉन्ड्रिंग से प्राप्त रकम का इस्तेमाल अवैध संगठनों को आर्थिक मदद देने का आरोप था। वहीं, भारत महादेव सट्टा ऐप से जुड़े कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उसकी वापसी चाहता था। भारत ने रायपुर की PMLA विशेष अदालत में चल रहे केस नंबर RPZO/10/2022 का हवाला दिया था।
सौरभ चंद्राकर को फर्जी पासपोर्ट से यात्रा करने के आरोप में ओमान में गिरफ्तार किया गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद भारत ने 12 जुलाई 2026 को ओमान की अदालत में उसे वापस लाने की मांग की। इसके दो दिन बाद, 14 जुलाई 2026 को UAE की प्रत्यर्पण याचिका भी अदालत पहुंची। भारत ने 2004 में दोनों देशों के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के आधार पर सौरभ को वापस मांगा था, जबकि UAE ने रियाद अरब न्यायिक सहयोग समझौते के तहत प्रत्यर्पण की मांग की थी। दोनों याचिकाओं में एक ही व्यक्ति का नाम होने के कारण अदालत ने दोनों मामलों को जोड़कर एक साथ सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के वकील ने भारत और UAE, दोनों देशों को प्रत्यर्पण नहीं करने की मांग की। वकील ने दलील दी कि सौरभ ने 2020 में दुबई स्थित भारतीय दूतावास में अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी थी और अब वह वानुअतु का नागरिक है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि कथित अपराध दोनों देशों की सीमा में हुआ, यह साबित नहीं किया गया है। इसके अलावा, UAE की अदालत में 2025 में इसी आरोप पर सौरभ को बरी किए जाने का दावा करते हुए दुबई की अपीलीय अदालत के केस नंबर 271/2024 का फैसला भी पेश किया गया था।
सौरभ की नागरिकता को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच, ओमान की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को भारतीय दूतावास से आधिकारिक जानकारी मांगी। अदालत ने पूछा था कि भारतीय पासपोर्ट नंबर U3226032 रखने वाले सौरभ चंद्राकर भारतीय नागरिक हैं या नहीं। 30 अगस्त 2026 को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने राजनयिक माध्यम से जवाब दिया। पत्र क्रमांक 582 में दूतावास ने पुष्टि की कि सौरभ चंद्राकर भारतीय नागरिक हैं और भारत में प्रत्यर्पण के लिए वांछित हैं। अदालत ने सौरभ के वकील की उस दलील को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि उसने 2020 में भारतीय नागरिकता छोड़ दी थी।
अदालत ने ओमान के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी मामले के तथ्यों की जांच करना, सबूतों का मूल्यांकन करना और उनकी विश्वसनीयता तय करना ट्रायल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सौरभ के पास वानुअतु की नागरिकता है, तब भी इससे उसका किसी दूसरे देश को प्रत्यर्पण करने पर रोक नहीं लगती, बशर्ते ओमान के कानून में तय शर्तें पूरी हों। इन्हीं आधारों पर अदालत ने उसकी नागरिकता छोड़ने की दलील को तथ्य और कानून, दोनों के लिहाज से निराधार मानते हुए खारिज कर दिया।
ओमान के प्रत्यर्पण कानून की धारा 11 के तहत किसी देश को आरोपी को वापस ले जाने के लिए कुछ कानूनी आश्वासन देने होते हैं, जिनमें तीन प्रमुख शर्तें शामिल हैं। अदालत ने पाया कि भारत ने ये तीनों आश्वासन दिए थे, जबकि UAE की याचिका में ये जरूरी आश्वासन शामिल नहीं थे। इसके अलावा, ओमान के कानून की धारा 6 के तहत जब एक ही व्यक्ति को दो देश मांगते हैं, तो अदालत उसकी नागरिकता, अपराध की जगह, अपराधों की गंभीरता और प्रत्यर्पण की मांग की तारीख जैसे पहलुओं पर विचार कर सकती है। कोर्ट ने पाया कि भारत की याचिका पहले आई थी और सौरभ की भारतीय नागरिकता की आधिकारिक पुष्टि भी हो चुकी थी। इन्हीं आधारों पर अदालत ने भारत को प्रत्यर्पण की मंजूरी दी और UAE की याचिका खारिज कर दी।
हालांकि, कोर्ट ने भारत को प्रत्यर्पण की मंजूरी तो दे दी थी, लेकिन तत्काल सौरभ को भारत भेजने का आदेश नहीं दिया था। इसकी वजह ओमान में उसके खिलाफ चल रहा फर्जी यात्रा दस्तावेज का मामला था। आदेश के मुताबिक, सौरभ को मस्कट इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ओमान छोड़ते समय पकड़ा गया था। आरोप था कि उसने फर्जी यात्रा दस्तावेज से ओमान में प्रवेश किया था। इस मामले में सीब प्राइमरी कोर्ट में केस नंबर 14691/5100/2026 चल रहा था। ओमान के कानून के मुताबिक, वहां चल रहे दूसरे आपराधिक मुकदमे की सुनवाई पूरी होने और सजा मिलने पर उसे भुगतने के बाद ही प्रत्यर्पण किया जाना था।
सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर 2026 को ओमान से भारत लाया गया। इसके बाद 2 नवंबर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। यहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उसे रायपुर ले जाकर पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड हासिल की। हालांकि, कोर्ट में सौरभ के वकील ने उसकी गिरफ्तारी को ही चुनौती दी। उनका तर्क था कि ओमान से प्रत्यर्पण की मंजूरी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मनी लॉन्ड्रिंग केस में मिली थी, CBI के केस में नहीं। कोर्ट ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड देते हुए उसे 4 नवंबर तक रायपुर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि सौरभ की गिरफ्तारी पर फैसला रायपुर की संबंधित विशेष अदालत करेगी।




