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न्याय के इंतजार में बीत गए 39 साल, ₹100 की रिश्वत मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अब किया बाइज्जत बरी

15 अगस्त विज्ञापन


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 39 साल पुराने रिश्वतखोरी के मामले में एक व्यक्ति को राहत दी है। जगेश्वर प्रसाद अवस्थी पर बकाया बिल बनाने के लिए 100 रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था। निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था लेकिन हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में सजा को रद कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत मांगने का ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा।

Publish Date: Sat, 20 Sep 2025 11:04:59 PM (IST)

Updated Date: Sat, 20 Sep 2025 11:04:59 PM (IST)

न्याय के इंतजार में बीत गए 39 साल।

HighLights

  1. रिश्वत मामले में 83 वर्षीय पूर्व कर्मचारी 39 साल बाद दोष मुक्त
  2. वर्ष 1985-86 में 100 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था
  3. कोर्ट ने फैसले को निरस्त करते हुए अवधिया को दोष मुक्त किया

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (MPSRTC) के 83 वर्षीय पूर्व बिल असिस्टेंट जागेश्वर प्रसाद अवधिया को लगभग चार दशक पुराने रिश्वत के मामले में दोष मुक्त कर दिया है। उन पर वर्ष 1985-86 में 100 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था।

100 रुपये की मांगी थी रिश्वत

24 अक्टूबर 1986 को अशोक कुमार वर्मा ने लोकायुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अवधिया ने उनकी सेवा अवधि के बकाया बिल को पास करने के लिए 100 रुपये की रिश्वत मांगी थी। लोकायुक्त की एक ट्रैप टीम ने उन्हें रायपुर में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। 9 दिसंबर 2004 को निचली अदालत ने अवधिया को दोषी ठहराया और एक साल की सजा के साथ 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।

यह भी पढ़ें- शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर 12 करोड़ की ठगी, पुलिस ने पांच लोगों को किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला

अवधिया द्वारा दायर अपील पर जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अवैध रिश्वत की मांग और स्वीकृति को साबित करने में अभियोजन पक्ष की विफलता के कारण कार्यवाही अस्थिर हो गई है। इसलिए, अपीलकर्ता (अवधिया) के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसलिए निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए अवधिया को दोष मुक्त किया जाता है। वहीं, पत्रकारों से बात करते हुए अवधिया ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित होने के समान है। उन्होंने सरकार से पेंशन सुविधा प्रदान करने का आग्रह किया।



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