नागपुर में नौकरी का झांसा देकर बालोद के मजदूरों को तमिलनाडु में किया कैद, परिजनों से वसूले पैसे
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से मानव तस्करी और बंधक बनाए जाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां के दो मजदूरों को अच्छी नौकरी का झांसा देकर तमिलनाडु ले जाया गया और वहां उन्हें बंधक बना लिया गया है। इस घटना के बाद से पीड़ितों के परिवार गहरे संकट में हैं और उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन मजदूरों को शुरुआत में महाराष्ट्र के नागपुर में एक बिस्किट फैक्ट्री में काम दिलाने का प्रलोभन दिया गया था। रोजगार की तलाश में ये मजदूर नागपुर जाने के लिए तैयार हुए, लेकिन उन्हें धोखे से तमिलनाडु ले जाया गया। वहां पहुंचने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई और उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रोक लिया गया।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि तमिलनाडु में इन मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया है और उनसे जबरन श्रम कराया जा रहा है। बंधक बनाने वालों ने मजदूरों को छोड़ने के बदले पैसों की मांग की। बताया जा रहा है कि मजदूरों को मुक्त कराने के नाम पर परिजनों से अब तक 16 हजार रुपये की वसूली भी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया है।
इस धोखाधड़ी और शोषण का शिकार हुए मजदूरों के परिवारों ने अब न्याय के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। पीड़ितों के परिजनों ने बालोद कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को इस पूरे मामले की लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने मांग की है कि तमिलनाडु में फंसे इन मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
परिजनों का कहना है कि वे आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं और फिरौती की रकम जुटाना उनके लिए बहुत मुश्किल था। इसके बावजूद उन्होंने किसी तरह पैसे दिए, लेकिन मजदूरों की रिहाई नहीं हुई। अब उन्हें अपने परिजनों की सुरक्षा और जान का डर सता रहा है। उन्हें डर है कि कहीं उनके साथ कोई अनहोनी न हो जाए।
बालोद पुलिस और प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस अब उन बिचौलियों और आरोपियों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने इन मजदूरों को नागपुर के बहाने तमिलनाडु भेजा था। इस मामले में अंतरराज्यीय जांच की आवश्यकता पड़ सकती है ताकि बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाया जा सके और इस गिरोह का पर्दाफाश हो सके।



