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भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता: पांच साल के लिए सामाजिक सुरक्षा भुगतान से छूट, 75,000 भारतीय पेशेवरों को होगा लाभ

15 अगस्त विज्ञापन


भारत और ब्रिटेन के बीच हुए सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत अब भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन में अस्थायी तौर पर भेजे गए कर्मचारियों के लिए पांच वर्ष तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान नहीं देना होगा। इस कदम से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और इंफोसिस जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा समझौता या डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) 15 जुलाई से व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के साथ लागू होगा। मंत्रालय के अनुसार, डीसीसी के तहत अस्थायी नियुक्ति पर ब्रिटेन भेजे गए भारतीय कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को वहां दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान राशि जमा करने से छूट मिलेगी। इस छूट की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है।

समझौते के प्रमुख लाभ:


  • दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से मुक्ति: डीसीसी भारतीय श्रमिकों और नियोक्ताओं को यूके में अस्थायी असाइनमेंट के दौरान दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान करने से मुक्त करता है। पहले यह छूट तीन साल की थी, जिसे अब बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया है।

  • व्यापक लाभ: इस समझौते से 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और 900 से अधिक कंपनियों को लाभ होने की उम्मीद है।

  • कर्मचारियों की गतिशीलता में वृद्धि: यह समझौता अस्थायी विदेशी असाइनमेंट पर जाने वाले कर्मचारियों की गतिशीलता का समर्थन करेगा और उनकी सामाजिक सुरक्षा कवरेज को जारी रखेगा।

  • सेवा क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा: यह समझौता भारत-यूके की सेवा क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करेगा, जिससे दोनों देशों के उच्च कौशल और नवीन सेवा क्षेत्रों का लाभ उठाया जा सकेगा।

यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिटेन, 283 अरब डॉलर के भारतीय आईटी उद्योग के लिए दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ब्रिटेन की भारतीय आईटी निर्यात में 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इस समझौते से भारतीय आईटी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और ब्रिटने में उनके परिचालन को सुगम बनाया जा सकेगा।



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