
गरियाबंद: गरियाबंद नगर में आवारा कुत्तों के लिए चलाया गया एंटी-रेबीज टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह अभियान छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी “आवारा पशुओं के स्वास्थ्य एवं रेबीज नियंत्रण योजना” के तहत नगर पालिका द्वारा संचालित किया गया, जिसका उद्देश्य शहर को रेबीज मुक्त बनाना और मानव–पशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नगर पालिका प्रशासन ने इसे प्राथमिकता के साथ लेते हुए वार्डवार विशेष कार्ययोजना तैयार की और निर्धारित समय सीमा के भीतर टीकाकरण लक्ष्य हासिल कर लिया।
अभियान के दौरान शहरभर में फैले आवारा कुत्तों की पहचान कर उनका रजिस्ट्रेशन किया गया, ताकि किसी भी क्षेत्र में कोई कुत्ता वैक्सीनेशन से वंचित न रह जाए। इसके लिए नगर पालिका ने अलग‑अलग टीमों का गठन किया, जिनमें पशु चिकित्सक, पैरावेट स्टाफ और सफाईकर्मियों के साथ स्थानीय स्वंयसेवी युवाओं को भी जोड़ा गया। सुबह और शाम के समय टीमों ने मोहल्लों, बाजार क्षेत्रों, बस स्टैंड, स्कूलों के आसपास और सुनसान इलाकों में जाकर कुत्तों को पकड़ने और सुरक्षित तरीके से टीका लगाने का कार्य किया। जहां सीधे पकड़ना संभव नहीं था, वहां मुनादी और जागरूकता से लोगों की मदद ली गई।
नगर पालिका ने टीकाकरण के साथ‑साथ जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया। अभियान के दौरान लाउडस्पीकर, पंपलेट और सोशल मीडिया के माध्यम से नागरिकों को जानकारी दी गई कि रेबीज एक घातक बीमारी है, लेकिन समय रहते बचाव और टीकाकरण से इससे पूरी तरह बचा जा सकता है। लोगों से अपील की गई कि वे आवारा कुत्तों को पत्थर या डंडे से मारने के बजाय प्रशासन की टीम को सूचना दें, ताकि उन्हें टीका लगाकर नियंत्रित किया जा सके। स्कूलों में भी छोटे-छोटे कार्यक्रम रखकर बच्चों को कुत्तों से सुरक्षित व्यवहार और काट लिए जाने पर क्या प्राथमिक उपचार करना चाहिए, इसकी जानकारी दी गई।
अभियान में जुटे पशु चिकित्सा दल ने यह सुनिश्चित किया कि लगाए जाने वाले एंटी-रेबीज टीके की गुणवत्ता उच्च स्तरीय हो और कोल्ड चेन पूरी तरह सुरक्षित रहे। टीकाकरण के बाद कुत्तों पर विशेष मार्किंग की गई, ताकि दोबारा पकड़ने या टीका लगाने की आवश्यकता न पड़े। कुछ स्थानों पर जहाँ आवारा कुत्तों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक थी, वहां नसबंदी कार्यक्रम की रूपरेखा भी तैयार की गई है, ताकि भविष्य में अनियंत्रित वृद्धि पर रोक लगाई जा सके। इस तरह यह अभियान केवल टीकाकरण तक सीमित न रहकर दीर्घकालिक जनस्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बन रहा है।
नगर पालिका अध्यक्ष और अधिकारियों ने संयुक्त बयान में बताया कि इस अभियान के सफल क्रियान्वयन से शहर में कुत्ता काटने की घटनाओं और रेबीज के संभावित खतरे में उल्लेखनीय कमी आएगी। उन्होंने नागरिकों को सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए आश्वस्त किया कि आने वाले समय में भी इस तरह के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी अभियानों को नियमित रूप से चलाया जाएगा। साथ ही, आवारा पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय, नसबंदी और नियमित स्वास्थ्य जांच की दिशा में भी ठोस पहल की जाएगी, ताकि गरियाबंद को पशु–मानव सहअस्तित्व का एक बेहतर और सुरक्षित शहर बनाया जा सके।




