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दीपावली खुशियां बांटने और अपनों के साथ त्योहार मनाने का मौका

15 अगस्त विज्ञापन

दीपावली खुशियां बांटने और अपनों के साथ त्योहार मनाने का मौका है। इस दौरान आतिशबाजी भी खुशियों का हिस्सा होती है। छत्तीसगढ़ समेत देशभर में दीपावली पर पटाखों की आवाज गूंज रही है। गली-मोहल्लों से लेकर खुले मैदानों तक लोग आतिशबाजी कर रहे हैं। हालांकि, थोड़ी सी लापरवाही त्योहार की खुशियों को अस्पताल के चक्कर में बदल सकती है।

पटाखों से हाथ-पैर झुलसने, आंखों में चोट लगने और तेज आवाज से सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। कई बार हादसे के बाद लोग जले हुए हिस्से पर टूथपेस्ट, घी या तेल लगा देते हैं, जिससे परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए पटाखे जलाते समय सावधानी बरतने के साथ हादसा होने पर शुरुआती मिनटों में सही उपचार की जानकारी होना भी जरूरी है।

रायपुर के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी स्पेशलिस्ट डॉ. सुनील कालडा से जानिए पटाखे जलाते समय किन सावधानियों का ध्यान रखें और जलने या चोट लगने पर तुरंत क्या करें। वहीं, दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:05 से रात 8 बजे तक रहेगा।

1. पटाखों के साथ छेड़छाड़ न करें, हाथ में लेकर जलाना खतरनाक

पटाखों को उनकी बनावट और इस्तेमाल के निर्देशों के मुताबिक ही जलाना चाहिए। रॉकेट, अनार या दूसरे पटाखों को हाथ में लेकर जलाने की गलती न करें। ऐसा करने से पटाखा हाथ में ही फट सकता है और गंभीर चोट लग सकती है।

2. पटाखे जलाने का सही तरीका अपनाएं, आसपास जगह खाली रखें

पटाखे जलाने के लिए जल्दबाजी न करें। डॉ. कालडा के मुताबिक, अगरबत्ती या लंबी फुलझड़ी की मदद से पटाखे जलाना बेहतर रहता है। इससे हाथ और पटाखे के बीच दूरी बनी रहती है।

पटाखे जलाने से पहले आसपास की जगह खाली कर लें। रॉकेट और अनार जैसे पटाखों के लिए खुली जगह चुनें। आसपास मकान, वाहन, पेड़ या बिजली के तार नहीं होने चाहिए। एक समय में एक ही पटाखा जलाएं और बाकी लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखें।

15 अगस्त विज्ञापन
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