Uncategorized

छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग का अजूबा, बन रही राज्य की पहली सिक्स-लेन ट्विन टनल, 12 घंटे का सफर अब 6 घंटे में होगा पूरा

15 अगस्त विज्ञापन


भारतमाला परियोजना फेज-1 के तहत निर्माणाधीन रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कारिडोर पर छत्तीसगढ़ की पहली सिक्स-लेन ट्विन टनल तेजी से आकार ले रही है। …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 31 May 2026 10:19:51 PM (IST)Updated Date: Sun, 31 May 2026 10:19:51 PM (IST)

टनल का दूसरा हिस्सा- एनएचएआई।

HighLights

  1. पहाड़ों के बीच छत्तीसगढ़ की पहली सिक्स-लेन ट्विन टनल अगले माह से होगी शुरू
  2. जुलाई से खुलेगा टनल का एक हिस्सा, रायपुर-विशाखापत्तनम कॉरिडोर का रास्ता
  3. वन्यजीवों को बचाने के लिए टनल क्षेत्र में बनेंगे एनिमल अंडरपास और वायाडक्ट

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। भारतमाला परियोजना फेज-1 के तहत निर्माणाधीन रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कारिडोर पर छत्तीसगढ़ की पहली सिक्स-लेन ट्विन टनल तेजी से आकार ले रही है। कांकेर और कोंडागांव जिले की पहाड़ियों के बीच करीब 2.79 किलोमीटर लंबी यह अत्याधुनिक सुरंग केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि राज्य की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में शामिल होने जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग-130 सीडी के पैकेज-03 में बन रही यह ट्विन ट्यूब टनल कठिन पहाड़ी भूभाग, घने जंगल और वन्यजीव क्षेत्र के बीच तैयार की जा रही है।

निर्माण में प्रयुक्त अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा उपाय

निर्माण में अत्याधुनिक ड्रिलिंग, नियंत्रित ब्लास्टिंग, राक सपोर्ट सिस्टम, कंक्रीट लाइनिंग और डिजिटल निगरानी तकनीक का उपयोग किया गया है। टनल के भीतर क्रास पैसेज, इमरजेंसी ले-बाय, वेंटिलेशन, फायर सेफ्टी और उपयोगिता गलियारे विकसित किए जा रहे हैं।

सफर का समय और दूरी होगी आधी

परियोजना पूरी होने के बाद रायपुर से विशाखापत्तनम की दूरी 132 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और सफर लगभग 12 घंटे से घटकर छह घंटे के आसपास रह जाएगा। अधिकारियों के अनुसार टनल का एक हिस्सा जुलाई 2026 तक यातायात के लिए तैयार हो सकता है, जबकि पूरा आर्थिक कारिडोर दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पहाड़ काटकर नहीं, पहाड़ के भीतर बनाया जा रहा रास्ता

टनल की सबसे बड़ी खासियत इसकी ट्विन-ट्यूब डिजाइन है। दोनों सुरंगें अलग-अलग यातायात दिशा के लिए विकसित की जा रही हैं। पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण के दौरान न्यू आस्ट्रियन टनलिंग मेथड जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। सुरंग के भीतर मजबूत राक बोल्ट, स्टील सपोर्ट और कंक्रीट लाइनिंग की कई परतें लगाई जा रही हैं। इससे भूस्खलन और दबाव जैसी चुनौतियों से सुरक्षा सुनिश्चित होगी। कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों के बावजूद निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

जंगल और वन्यजीवों को बचाने के लिए विशेष डिजाइन

टनल जिस क्षेत्र में बन रही है, वह घने जंगलों और वन्यजीव आवागमन वाले हिस्से के करीब माना जाता है। इसी वजह से परियोजना में एनिमल अंडरपास, वायाडक्ट और विशेष वन्यजीव मार्ग बनाए जा रहे हैं। इससे जानवरों की प्राकृतिक आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। सड़क को कई हिस्सों में ऊंचाई देकर बनाया जा रहा है, ताकि पर्यावरणीय प्रभाव कम रहे। यह परियोजना आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का उदाहरण मानी जा रही है।

यह भी पढ़ें- CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों तक आंधी-बारिश का अलर्ट, 60 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी तूफानी हवाएं

व्यापार, पर्यटन और उद्योग को मिलेगी नई गति

करीब 464 किलोमीटर लंबा रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक कारिडोर छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को तेज संपर्क देगा। इसके शुरू होने के बाद विशाखापत्तनम बंदरगाह तक माल परिवहन तेज होगा। बस्तर के वन उत्पाद, खनिज और कृषि उपज कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे। पर्यटन क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा। जगदलपुर, चित्रकोट और बस्तर के अन्य स्थलों तक पहुंच आसान होने से निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।



Source link

15 अगस्त विज्ञापन
विज्ञापन 1
विज्ञापन 2
विज्ञापन 3
विज्ञापन 4
विज्ञापन 5
विज्ञापन 6
विज्ञापन 7
विज्ञापन 8

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!