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छत्तीसगढ़ कांस्टेबल भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 6 हजार पदों पर रोक… जारी नहीं होंगे नियुक्ति पत्र

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छत्तीसगढ़ में वर्ष 2023 में हुई कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। भर्ती के दौरान शारीरिक दक्षता परीक्षा में गंभीर अनि …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 28 Jan 2026 04:54:20 AM (IST)Updated Date: Wed, 28 Jan 2026 07:14:03 AM (IST)

कांस्टेबल भर्ती पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नियुक्ति पर लगाई रोक। फाइल फोटो

HighLights

  1. फिजिकल टेस्ट में भ्रष्टाचार और डेटा हेरफेर के आरोप
  2. आउटसोर्स कंपनी पर निष्पक्षता नहीं बरतने का आरोप
  3. 129 अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिलने का दावा

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। वर्ष 2023 में लगभग 6,000 कांस्टेबल पदों पर हुई भर्ती से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक आगे किसी भी प्रकार के नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है।

यह मामला वर्ष 2023 में जारी कांस्टेबल भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे। फिजिकल टेस्ट के दौरान डेटा रिकार्डिंग का कार्य शासन द्वारा आउटसोर्स पर टाइम्स टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को सौंपा गया था। आरोप है कि उक्त कंपनी ने निष्पक्ष तरीके से कार्य नहीं किया और कई अभ्यर्थियों को पैसों के लेनदेन के माध्यम से अनुचित लाभ दिया गया।

इससे आहत होकर जिला सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ एवं मुंगेली के निवासी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव एवं ईशान सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीक़ी के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई 27 जनवरी को न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू के समक्ष हुई।

अगली सुनवाई तक कोई नियुक्ति आदेश नहीं होगा

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि शासन द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में स्वयं अधीक्षक पुलिस, जिला बिलासपुर ने स्वीकार किया है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और गलत डेटा दर्ज किए गए हैं। यहां तक कि टाइम्स टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फिजिकल टेस्ट से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए गए।

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू ने राज्य शासन को अगली सुनवाई तक कांस्टेबल पदों पर कोई भी नया नियुक्ति आदेश जारी न करने के निर्देश दिए। साथ ही उत्तरवादीगण को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस फैसले को राज्य की कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

29 अभ्यर्थियों को दिया गया बेजा लाभ

अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि शासन की जांच में कुल 129 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें अनुचित लाभ देते हुए ज्यादा अंक प्रदान किए गए थे। उन्होंने पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के नियम 7 का हवाला देते हुए कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर नई भर्ती कराई जानी चाहिए।

यह भी दलील दी गई कि चयन प्रक्रिया का समापन, अंतिम सूची जारी करना और नियुक्ति आदेश जारी करना पुलिस भर्ती नियम 2007 के प्रविधानों के विपरीत और गैरकानूनी है। साथ ही यह आशंका जताई गई कि यदि स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआइ से जांच कराई जाए, तो अन्य जिलों में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आ सकता है, जिससे मेधावी अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो पाया।



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