
गौरीशंकर गुप्ता/बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के सरहदी इलाकों में नशे की खेती का एक संगठित नेटवर्क सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। कोरंधा थाना क्षेत्र के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पुलिस ने सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर छापेमारी कर ढाई एकड़ में लहलहाती अफीम की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया। मौके से 285 बोरे में भरे 18 क्विंटल अफीम के पौधे जब्त किए गए, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग दो करोड़ रुपये आंकी गई है।
यह ऑपरेशन कुसमी पुलिस, राजस्व विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। खजूरी गांव के आसपास के जंगलों में छिपे खेतों पर रातभर निगरानी रखी गई। सुबह होते ही टीम ने घेराबंदी कर फसल को उखाड़ना शुरू किया। गिरफ्तार किसानों ने बताया कि झारखंड के तस्करों ने उन्हें लालच देकर खेत लीज पर ले अफीम की खेती करने को मजबूर किया था। दो मुख्य आरोपी भूपेंद्र और सहादुर नगेशिया ने कबूला कि फसल दो किस्तों में बोई गई थी, और डोडों पर 6-7 चीरे लगाकर अफीम का रस निकाला जा चुका था।
नेटवर्क का खुलासा
बलरामपुर-झारखंड सीमा पर स्थित होने से यह इलाका तस्करों का हॉटस्पॉट बन गया है। खेतों की निगरानी के लिए झारखंड से 5 लोग नियमित आते थे। पुलिस को शक है कि यह बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा है। हाल ही में समोदा और त्रिपुरी गांवों में भी इसी तरह की अफीम खेती पकड़ी गई, जहां 62 किलो से ज्यादा पौधे और 7 करोड़ कीमत जब्त हुई। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर सरगना की तलाश तेज कर दी गई है।
कलेक्टर ने साफ कहा कि नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस रहेगा। जिले भर में ड्रोन सर्विलांस और इंटेलिजेंस नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए पंचायत स्तर पर बैठकें हो रही हैं। यह कार्रवाई न सिर्फ मादक पदारोथों पर प्रहार है, बल्कि सीमावर्ती सुरक्षा को मजबूत करने का संदेश भी। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार ऐसी स्ट्राइक से नेटवर्क कमजोर होगा।




