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बिलासपुर: छुट्टी के दिन खुला हाई कोर्ट, गरीब बच्चों के एडमिशन में देरी पर नाराज हुए चीफ जस्टिस, सरकार से मांगा जवाब

15 अगस्त विज्ञापन


नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। शनिवार को अवकाश के दिन हाई कोर्ट खुला। आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में बरती जा रही लापरवाही को लेकर मीडिया में प्रकाशित खबर को चीफ जस्टिस ने स्वतः संज्ञान में लिया।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

प्रवेश प्रक्रिया में कोताही पर कोर्ट की नाराजगी

हालांकि आज न्यायालय का कार्य दिवस नहीं है, लेकिन मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्रदेश के निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर बरती जा रही कोताही पर नाराजगी जताई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश में एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ होने के बावजूद आरटीई अधिनियम के तहत कक्षा 1 में प्रवेश प्रक्रिया बेहद धीमी है। 38,438 आवेदनों में से केवल 23,766 (62%) का ही सत्यापन हुआ है, जिससे 16,000 से अधिक आवेदन लंबित हैं और कई जिलों में 10% से भी कम आवेदनों का सत्यापन हुआ है।

सत्यापन की धीमी गति और समयसीमा का उल्लंघन

यह भी ध्यान में रखते हुए कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने पंजीकरण और नोडल सत्यापन के लिए 16 फरवरी से 31 मार्च तक की समयसीमा निर्धारित की थी, जो अभी भी अधूरी है। नोडल अधिकारी और प्रिंसिपल स्तर पर सत्यापन की धीमी गति के कारण समय सीमा समाप्त हो गई है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अधिकांश जिलों में लंबित आवेदनों का नोडल सत्यापन समय पर पूरा नहीं हुआ है।

प्राप्त आवेदनों की संख्या और उपलब्ध सीटों के बीच असमानता है। लॉटरी के माध्यम से स्कूल आवंटन 13 से 17 अप्रैल के बीच निर्धारित है, लेकिन अपूर्ण सत्यापन के कारण इसमें देरी की संभावना जताई गई है, जिससे अभिभावकों को असुविधा होगी क्योंकि उन्हें बार-बार आना पड़ सकता है।

दो याचिकाओं पर अब एक साथ होगी सुनवाई

आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश में बरती जा रही लापरवाही को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने संज्ञान में लेते हुए अवकाश के दिन हाई कोर्ट में सुनवाई की। बता दें कि भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश को लेकर बरती जा रही लापरवाही के संबंध में अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है।

इस याचिका की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। अब 8 अप्रैल को इसी दिन स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका की भी सुनवाई होगी।

अधिवक्ताओं की दलीलें और अगली तारीख

डिवीजन बेंच ने दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करने की व्यवस्था दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सीवी भगवंत राव के अधिवक्ता देवर्षी ठाकुर, राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता पीके भादुड़ी और वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने पैरवी की। डिवीजन बेंच ने अधिवक्ताओं की दलीलों को सुना और अगली सुनवाई के लिए आठ अप्रैल की तिथि तय कर दी है।



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