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बाल दिवस : अधिकार कहां… न सही सुरक्षा और शिक्षा, न ही मूलभूत सुविधाएं

बाल दिवस को बच्चों की खुशियों, उनके अधिकारों और भविष्य को समर्पित बताया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि बच्चे आज सबसे ज्यादा उपेक्षा और असुरक्षा के शिकार हैं। पूर्व संध्या पर पत्रिका ने जायजा लिया तो पाया कि स्कूलों में शुद्ध पेयजल, पोषण, स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं अब भी बच्चों के लिए अधूरी हैं। ऊपर से शोषण, दुर्व्यवहार और हिंसा की घटनाएं आम होती जा रही हैं। संविधान में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को मौलिक अधिकारों में शामिल किया गया है, पर जमीनी स्तर पर इन प्रावधानों का पालन कहीं नजर नहीं आता और न ही नीतियां बनाते समय बच्चों की आवाज को शामिल किया जाता है।
15 अगस्त विज्ञापन




