दुर्ग में अतिथि शिक्षकों के आंदोलन पर पुलिस का सख्त रुख, प्रदर्शन खत्म करने की चेतावनी से भड़के शिक्षक
छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों का अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार को 23वें दिन भी जारी रहा। दुर्ग में प्रदर्शन कर रहे शिक्षक संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान वेतन और मानदेय में वृद्धि की मांग पर अड़े हुए हैं। शिक्षकों ने हाल ही में स्कूल शिक्षा मंत्री के निवास का 24 घंटे तक घेराव भी किया था, जिसके बाद बैठक का आश्वासन मिलने पर वे धरना स्थल पर वापस लौटे।
हालांकि, मंत्री के साथ चर्चा के बावजूद अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उनकी मांगों पर अभी तक कोई ठोस या सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। उनका आरोप है कि सरकार और संगठन के बीच बातचीत तो जारी है, लेकिन इसका कोई नतीजा सामने नहीं आया है। अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इसी बीच, बुधवार सुबह दुर्ग पुलिस भारी बल के साथ धरना स्थल पर पहुंची। प्रदर्शनकारी अतिथि शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें शाम तक धरना समाप्त करने की चेतावनी दी। शिक्षकों के अनुसार, पुलिस ने यह भी कहा कि यदि शाम तक प्रदर्शन खत्म नहीं किया गया, तो अगले दिन से उन्हें धरना स्थल पर बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पुलिस की इस चेतावनी के बाद आंदोलनकारी अतिथि शिक्षकों में नाराजगी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि वे पिछले 23 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं। शिक्षकों का आरोप है कि उनकी मांगों पर निर्णय लेने के बजाय प्रशासन आंदोलन समाप्त कराने का दबाव बना रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
अतिथि शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने दोहराया है कि वे पिछले 11 सालों से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह सेवा सुरक्षा और वेतन नहीं मिल रहा है। वे समान कार्य के बदले समान वेतन, सेवा सुरक्षा, संविलियन और मानदेय बढ़ाने की अपनी मूल मांगों पर अडिग हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता है, तो उनका आंदोलन जारी रहेगा और अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित और ठोस निर्णय चाहिए।
