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रायपुर के कर्बला तालाब इलाके में अवैध निर्माण: वेटलैंड प्राधिकरण के आदेशों की अनदेखी का आरोप, वन मंत्री से कार्रवाई की मांग – Raipur News

15 अगस्त विज्ञापन


रायपुर के प्रख्यात ईएनटी विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता ने वन मंत्री को पत्र लिखकर कर्बला तालाब क्षेत्र में जारी अवैध और प्रतिबंधित निर्माण कार्यों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने पत्र में बताया कि छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी

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इसके लिए नगर निगम रायपुर के आयुक्त को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। इस आदेश की प्रति नगर निगम को भी भेजी गई थी। इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, हाईएस्ट मीन फ्लड लेवल (HMFL) से 50 मीटर के भीतर प्रतिबंधित क्षेत्र में सीमेंट की दीवारें, रिटेनिंग वॉल और कंक्रीट कॉलम जैसे पक्के निर्माण कार्य अब भी जारी हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन कार्यों को रायपुर नगर निगम के अधिकारियों के संरक्षण में अंजाम दिया जा रहा है।

निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स ने भी खड़ी की नई दीवार

पत्र में यह भी बताया कि एक निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स के मालिक की ओर से भी 50 मीटर के भीतर एक नई दीवार खड़ी कर दी गई है, जो स्पष्ट रूप से वेटलैंड (प्रबंधन एवं संरक्षण) नियम, 2017 का उल्लंघन है। यह कार्य कर्बला तालाब की पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। राकेश गुप्ता ने 13 अक्टूबर 2025 को लिए गए निर्माण कार्यों के फोटो भी वन मंत्री को भेजे हैं, जो आदेशों की अवहेलना को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी

डॉ. गुप्ता ने अपने पत्र में यह भी कहा कि यह स्थिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ओर से बी.के. बालाकृष्णन बनाम केरल राज्य (2017) में दिए गए दिशा-निर्देशों की अवमानना है। उन्होंने कलेक्टर रायपुर और नगर निगम आयुक्त पर वेटलैंड प्राधिकरण के आदेशों की खुलेआम अवहेलना का आरोप लगाया। राकेश गुप्ता ने इस स्थिति को प्रशासनिक अनुशासन का घोर उल्लंघन बताया और कहा कि इससे न केवल शासन की कार्यप्रणाली बल्कि उसकी पर्यावरणीय प्रतिबद्धता पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगते हैं।

मंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग

डॉ. गुप्ता ने वन मंत्री इस मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यक्तिगत रूप से संज्ञान में लेने की मांग की है, ताकि छत्तीसगढ़ वेटलैंड प्राधिकरण के आदेशों की गरिमा बनी रहे और कर्बला तालाब सहित प्रदेश के अन्य जलाशयों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर शासन की संवेदनशीलता केवल कागजों तक सीमित रह गई है।



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