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NCERT Book Row: सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सरकार विशेषज्ञ समिति बनाए तो अच्छा लगेगा; अब सभी किताबें रिव्यू करें

15 अगस्त विज्ञापन


केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि उसने एनसीईआरटी को सभी कक्षाओं की किताबों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि एनसीईआरटी से ऐसा करने के लिए कहने के बजाय, अगर केंद्र पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के लिए एक विशेषज्ञ कमिटी बनाता तो अच्छा होता।

सुप्रीम कोर्ट एनसीईआरटी की क्लास आठ की सोशल साइंस की किताब से जुड़े एक सुओ मोटो केस की सुनवाई कर रहा था, जिसमें ज्यूडिशियरी में को लेकर आपत्तिजनक कंटेंट प्रकाशित किया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने एनसीईआरटी से सिर्फ कक्षा आठ की नहीं, बल्कि सभी क्लास की टेक्स्टबुक्स का समीक्षा करने को कहा है। उन्होंने बेंच को भरोसा दिलाया कि पाठ्यक्रम की जांच के लिए डोमेन विशेषज्ञ का एक पैनल बनाया जाएगा।


तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि एनसीईआरटी में व्यवस्था को सुधारने के लिए बड़े बदलाव शुरू हो गए हैं। अब विशेषज्ञों की मंजूरी के बिना कोई भी नई सामग्री प्रकाशित नहीं की जाएगी। इसके साथ ही एनसीईआरटी के डायरेक्टर ने कोर्ट में हलफनामा देकर बिना शर्त माफी भी मांग ली है।


इससे पहले 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब की छपाई और इंटरनेट पर इसके वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि किताब में लिखी बातें न्यायपालिका पर गोली चलाने जैसी हैं और इससे संस्थान को गहरा जख्म मिला है। कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की गरिमा गिराने की एक गहरी साजिश और सोची-समझी चाल करार दिया। अदालत ने आदेश दिया है कि बाजार में मौजूद इस किताब की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त किया जाए और उन्हें सार्वजनिक पहुंच से पूरी तरह हटाया जाए।

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