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55 की उम्र में दंपति अब बन सकेंगे माता-पिता, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से मिली IVF की अनुमति

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हाई कोर्ट ने दंपति को आइवीएफ की इजाजत दे दी है। साथ ही क्लीनिक को तत्काल आइवीएफ शुरू करने का निर्देश दिया है। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 25 Apr 2026 10:30:22 PM (IST)Updated Date: Sat, 25 Apr 2026 10:30:22 PM (IST)

क्लिनिक को तत्काल IVF शुरू करने के दिए निर्देश।

HighLights

  1. मासूम बेटी को खोने वाले दंपति की सुनी गई पुकार
  2. 55 साल के पिता को पिता बनने की मिली इजाजत
  3. क्लिनिक को तत्काल IVF शुरू करने के दिए निर्देश

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। इकलौती बेटी के असयम निधन के सदमे से उबरने के बाद एक दंपती ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आइवीएफ के जरिए माता-पिता बनने की अनुमति मांगी थी। याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने दंपति को आइवीएफ की इजाजत दे दी है। साथ ही क्लीनिक को तत्काल आइवीएफ शुरू करने का निर्देश दिया है।

दंपति को IVF की दी अनुमति

हाई कोर्ट ने एक अहम मामले में अपनी इकलौती संतान खोने वाली दंपति को 55 वर्ष की उम्र में IVF, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन के जरिए दोबारा माता पिता बनने की अनुमति दी है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद के सिंगल बेंच ने कहा कि संतान सुख भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। हाई कोर्ट कालोनी निवासी 49 वर्षीय महिला और उनके 55 वर्षीय पति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा है कि वर्ष 2022 में उनकी इकलौती बेटी का असामयिक निधन हो गया था।

इस घटना से वे गहरे मानसिक और भावनात्मक सदमे में चले गए। त्रासदी से उबरने और खुद को दोबारा संभालने में उन्हें काफी वक्त लग गया। सदमे से उबरने के बाद उन्होंने फिर से परिवार शुरू करने का फैसला लिया और बिलासपुर स्थित एक निजी IVF सेंटर में परामर्श लिया। जांच के बाद डाक्टरों ने उन्हें मेडिकल रूप से फिट पाया। हालांकि बाद में मना कर दिया गया।

चिकित्सक ने इसलिए किया इनकार

चिकित्सकीय जांच के बाद यह पता चला कि पति फरवरी 2026 में 55 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। एआरटी, असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी एक्ट 2021 की धारा 21 (जी) के तहत पुरुष के लिए अधिकतम उम्र 55 वर्ष और महिला के लिए 50 वर्ष निर्धारित है। नियमों का हवाला देते हुए और तकनीकी आधार पर आइवीएफ सेंटर के डाक्टरों ने इलाज शुरू करने से इन्कार कर दिया था।

यह भी पढ़ें- भगवान राम-परशुराम पर टिप्पणी से GGU बिलासपुर में भारी तनाव, छात्रों के दो गुट भिड़े, 4 छात्र निष्कासित

कोर्ट ने कहा- उम्र का नियम व्यक्तिगत, सामूहिक नहीं

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि संतान पाने का अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। एआरटी कानून में उम्र की शर्त पति-पत्नी दोनों पर अलग-अलग लागू होती है। पत्नी 50 साल से कम और मेडिकल रूप से सक्षम है, इसलिए सिर्फ पति की ज्यादा उम्र के आधार पर उन्हें रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने बेटी की मृत्यु को विशेष परिस्थिति माना। क्लिनिक और चिकित्सक को तुरंत IVF शुरू करने और इलाज बीच में न रोकने का निर्देश दिया है।



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