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“चक दे इंडिया” की कोमल चौटाला: छत्तीसगढ़ मेरा ससुराल, बस्तर की सुंदरता दुनिया को दिखाऊंगी

15 अगस्त विज्ञापन

फिल्म ‘चक दे इंडिया’ में हॉकी खिलाड़ी कोमल चौटाला के यादगार किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री चित्रांशी रावत हाल ही में छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में शामिल होने के लिए रायपुर पहुंचीं। इस अवसर पर उन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल के साथ एक विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने अपने फिल्मी सफर, हॉकी से अपने गहरे रिश्ते और छत्तीसगढ़ से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को साझा किया। चित्रांशी ने स्पष्ट रूप से कहा कि छत्तीसगढ़ उनका ससुराल है और वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता, खासकर बस्तर के जंगलों और झरनों को दुनिया के सामने लाना चाहती हैं।

चित्रांशी रावत ने ‘चक दे इंडिया’ फिल्म के बाद अपने जीवन में आए बदलावों पर बात करते हुए बताया कि इतने साल बीत जाने के बाद भी लोग उन्हें आज भी उसी किरदार और फिल्म से पहचानते हैं, जो उनके लिए एक खूबसूरत अनुभव है। उन्होंने कहा कि आज वह छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में जिस वजह से खड़ी हैं, वह भी वही फिल्म है। इतने सालों बाद भी लोगों का यह प्यार और उन्हें कोमल चौटाला के नाम से जानना उन्हें बहुत अच्छा लगता है, जो फिल्म के स्थायी प्रभाव को दर्शाता है।

हॉकी से अपने बचपन के जुड़ाव को याद करते हुए चित्रांशी ने बताया कि उन्होंने चौथी कक्षा से हॉकी खेलना शुरू कर दिया था और 12वीं तक आते-आते वह ‘चक दे इंडिया’ का हिस्सा बन चुकी थीं। उनके लिए हॉकी और यह फिल्म एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने एक कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि आप किसी व्यक्ति को खेल से दूर कर सकते हैं, लेकिन उसके अंदर से खिलाड़ी को नहीं निकाल सकते। हॉकी की वजह से ही उन्हें ‘चक दे इंडिया’ मिली और उसी फिल्म की वजह से आज वह यहां खड़ी हैं।

‘चक दे इंडिया’ में कोमल चौटाला का किरदार मिलने के बारे में चित्रांशी ने बताया कि यह सब तब हुआ जब वह जूनियर नेशनल खेलने के लिए मध्य प्रदेश के जबलपुर गई थीं। वहां हॉकी खेलते समय ही फिल्म के डायरेक्टर शिमित अमीन ने उनका ऑडिशन लिया, जिसके बाद उनका चयन हो गया और वह धीरे-धीरे फिल्म का हिस्सा बन गईं। आज छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में आकर उन्हें इसलिए भी अच्छा लगता है, क्योंकि उनके सफर की शुरुआत भी हॉकी के मैदान से ही हुई थी, जिसने उन्हें एक खिलाड़ी से अभिनेत्री तक का रास्ता दिखाया। हालांकि, अब वह हॉकी नहीं खेलतीं, लेकिन उनके साथ कैंप करने वाली कई खिलाड़ी आगे चलकर भारतीय टीम के लिए खेलीं और कुछ भारतीय टीम की कप्तान भी बनीं।

आज की हॉकी में हो रहे बदलावों को चित्रांशी काफी करीब से देखती हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि पहले इस तरह की लीग नहीं हुआ करती थीं, लेकिन अब राज्य स्तर पर भी हॉकी को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन हो रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के खेल मंत्री अरुण साव और अन्य लोगों की पहल की सराहना की, जिन्होंने प्रदेश में हॉकी को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। चित्रांशी का मानना है कि कई बच्चे खेलना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही मंच और मौका मिलना भी जरूरी है। जब अपने राज्य में उन्हें ऐसा प्लेटफॉर्म मिलता है, तो वे आगे चलकर देश का नाम रोशन कर सकते हैं, क्योंकि खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने की शुरुआत राज्य स्तर से ही होती है।

चित्रांशी रावत ने छत्तीसगढ़ से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनकी शादी रायपुर के रहने वाले ध्रुवदित्य भगवनानी से हुई है, इसलिए छत्तीसगढ़ उनका ससुराल है। वह यहां अक्सर आती रहती हैं और उन्होंने यहां फिल्मों की शूटिंग भी की है, जिससे उन्हें बस्तर को काफी अच्छे से घूमने का मौका मिला है। चित्रांशी ने छत्तीसगढ़ की खूबसूरती, खासकर बस्तर के जंगलों और झरनों की जमकर तारीफ की और कहा कि यह ऐसा राज्य है जिसे पर्यटन के लिहाज से और प्रमोट करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि देश के बहुत से लोगों ने इस राज्य को उस नजर से देखा ही नहीं है, और पिछले साल जब वह बस्तर में शूटिंग कर रही थीं, तब भी लोगों के मन में बस्तर को लेकर कई तरह की धारणाएं थीं। इसकी एक वजह यह भी है कि लोग यहां की खूबसूरती और पर्यटन स्थलों के बारे में ज्यादा नहीं जानते। चित्रांशी ने लोगों से अपील की कि वे छत्तीसगढ़ आएं, बस्तर घूमें और इस खूबसूरत राज्य को करीब से देखें।

सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज के बारे में चित्रांशी का मानना है कि एक सही मानसिकता बहुत आवश्यक है। एक खिलाड़ी होने के नाते खेल ने उन्हें यह बात बहुत अच्छी तरह सिखाई है कि हार को दिल पर नहीं लेना चाहिए और जीत को सिर पर नहीं चढ़ाना चाहिए। वह इसी सोच के साथ आगे बढ़ी हैं और मानती हैं कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन अगर आप हार से सीखते हैं और जीत के बाद भी जमीन से जुड़े रहते हैं, तो आगे बढ़ना आसान होता है। अपनी व्यक्तिगत पसंद के बारे में उन्होंने बताया कि वह उत्तराखंड से आती हैं, जो एक पहाड़ी इलाका है, इसलिए पहाड़ों और जंगलों से उनका गहरा जुड़ाव रहा है और उन्हें समुद्र से ज्यादा पहाड़ और जंगल पसंद हैं। अपने फैशन सेंस को उन्होंने ‘कूल, कैजुअल और मूड के हिसाब से’ बताया, क्योंकि उन्हें जो उस वक्त अच्छा लगता है, वही पहनना पसंद करती हैं।

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