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48 करोड़ रुपए का जमीन घोटाला! EOW ने की कार्रवाई, दलाल सहित 4 आरोपी गिरफ्तार.. | Land scam of Rs 48 crores! EOW took action,

15 अगस्त विज्ञापन


साथ ही उक्त चारों को विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश कर पूछताछ करने के लिए 1 मई तक पूछताछ करने के लिए रिमांड पर लिया है। ईओडब्ल्यू के विशेष लोक अभियोजक ने मिथिलेश वर्मा ने बताया कि गिरफ्तार किए गए उक्त चारों आरोपी भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाले की अहम कड़ी हैं।

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CG Fraud News: घोटाले में इस तरह रही भूमिका

इस घोटाले की जांच के दौरान सभी के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और जमीन से संबंधित पेपर्स मिले हैं। चारों आरोपी किसानों से सस्ती कीमतों पर जमीन लेने के बाद उसे परियोजना से जुड़े राजस्व विभाग के अफसरों को हैंडओवर कर ज्यादा कीमत वसूल करते थे।

उक्त दस्तावेजों में खुद को भूस्वामी और पॉवर ऑफ अटार्नी का उपयोग करते हुए मुआवजा राशि लेकर जमीन के वास्तविक मालिकों को देते थे। खेल में अफसरों की भूमिका भी रही है। जांच में इसके दस्तावेज मिलने के बाद प्रथम चरण में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उक्त आरोपियों से पूछताछ करने के बाद अन्य लोगों के बयान लिए जाएंगे। साथ ही उनको भी गिरफ्तार किया जाएगा।

जमीन की दलाली में खेल

भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले की जांच के दौरान पता चला कि रायपुर से लेकर विशाखापट्टनम तक प्रस्तावित सडक़ के लिए जमीन का अधिग्रहण दलालों के जरिए किया गया। अफसरों ने पर्दे के पीछे रहकर जमीन दलालों की मिलीभगत कर जमीन को टुकड़ों में बांटकर फर्जी लोगों के नाम चढ़वाने का काम किया।

साथ ही लाभर्थियों को उनके जमीन के वास्तविक मुआवजा राशि के अनुपात में कम राशि देकर किसानों के साथ ही राज्य को करोड़ों रुपए का चूना लगाया। वहीं कमीशन की रकम को आपस में बंदरबाट किया। बता दें कि जांच करने 25 अप्रैल को ईओडब्ल्यू ने 20 ठिकानों में छापेमारी की थी।

1 मई तक पूछताछ करने लिया रिमांड पर

घोटाले में जमीन दलाली करने वाली उमा और उसके पति केदार तिवारी को दूसरे व्यक्ति के मुआवजा राशि दो करोड़ रुपए अवैध तरीके से प्राप्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा को उमा तिवारी के सहयोगी के रूप में अधिग्रहण की रकम लेने और किसानों की मुआवजा राशि हड़पने के आरोप है।

कारोबारी विजय जैन को उमा तिवारी के सहयोगी के रूप में अधिग्रहण की रकम फर्जी तरीके से लेने और कमीशनखोरी करने का आरोप है। बताया जाता है कि रिमांड अवधि के दौरान सभी की भूमिका के संबंध में पूछताछ कर अन्य आरोपियों के संलिप्तता तय होगी। उक्त सभी को घोटाले में आरोपी बनाया जाएगा।



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