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Year Ender 2025: सुरक्षाबलों ने तोड़ी माओवाद की कमर, हिड़मा और बसवा राजू समेत 10 खूंखार कमांडरों का हुआ अंत

15 अगस्त विज्ञापन


नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। साल 2025 भारतीय सुरक्षा इतिहास में माओवाद के विरुद्ध ‘निर्णायक युद्ध’ के वर्ष के रूप में दर्ज हो गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर अबूझमाड़ के घने जंगलों तक, सुरक्षाबलों ने इस साल वह कर दिखाया जो पिछले तीन दशकों में नहीं हुआ था। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले ही माओवादियों का किला ढहता नजर आ रहा है।

इस साल सुरक्षाबलों ने न केवल माओवादियों की संख्या कम की, बल्कि उनके ‘ब्रेन ट्रस्ट’ और टॉप कमांडरों का सफाया कर संगठन की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है। आइए जानते हैं साल 2025 की उन 10 बड़ी मुठभेड़ों के बारे में, जिन्होंने लाल आतंक के अंत की पटकथा लिख दी:

1. माड़वी हिड़मा: आतंक के पर्याय का अंत (इनाम: ₹1.50 करोड़)

18 नवंबर 2025 को सुरक्षाबलों ने सबसे बड़ी सफलता तब हासिल की, जब खूंखार कमांडर माड़वी हिड़मा को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया। सुकमा के पूवर्ती गांव का रहने वाला हिड़मा पिछले दो दशकों से सुरक्षाबलों पर हुए हर बड़े हमले का मास्टरमाइंड था। वह कोर कमेटी का सदस्य और गुरिल्ला वारफेयर का उस्ताद माना जाता था।

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2. बसवा राजू उर्फ गगन्ना: इंजीनियर से महासचिव तक (इनाम: ₹1.50 करोड़)

अबूझमाड़ के जंगलों में 21 मई 2025 को बसवा राजू मारा गया। बीटेक इंजीनियर रहा बसवा राजू माओवाद संगठन में ‘पोलित ब्यूरो’ का महासचिव था। वह न केवल हथियारों का विशेषज्ञ था, बल्कि माओवादी रणनीति बनाने में सबसे ऊपर था।

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3. गणेश उईके: सेंट्रल कमेटी का बड़ा स्तंभ (इनाम: ₹1 करोड़ से अधिक)

क्रिसमस के दिन यानी 25 दिसंबर को ओडिशा के कंधमाल में सुरक्षाबलों ने गणेश उईके को मार गिराया। तेलंगाना का रहने वाला उईके सेंट्रल कमेटी का सदस्य और ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था। इसकी मौत ने ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर माओवादियों के नेटवर्क को तबाह कर दिया है।

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4. जयराम उर्फ चलपति: गरियाबंद में सफाया (इनाम: ₹1 करोड़)

21 जनवरी को गरियाबंद में हुई मुठभेड़ में कोर कमेटी सदस्य चलपति को मार गिराया गया। आंध्र प्रदेश का रहने वाला यह माओवादी कई उपनामों से सक्रिय था और संगठन के रणनीतिक निर्णयों में अहम भूमिका निभाता था।

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5. सुधाकर उर्फ नर सिंहाचलम: बीजापुर में अंत (इनाम: ₹1 करोड़)

7 जून को बीजापुर के नेशनल पार्क एरिया में सुधाकर का एनकाउंटर हुआ। सुधाकर 17 सालों से अबूझमाड़ में सक्रिय था और तेलंगाना, छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।

यह भी पढ़ें- Year Ender 2025: सोनम बेवफा….देश भर में चर्चित रहा इंदौर का हनीमून मर्डर केस, 2025 में MP की इन बड़ी घटनाओं ने बटोरी सुर्खियां

अन्य प्रमुख कमांडरों का सफाया

  • भास्कर (इनाम ₹45 लाख): बीजापुर में मंचेरियल DVC सचिव भास्कर को ढेर किया गया।
  • रेणुका उर्फ भानु (इनाम ₹45 लाख): 31 मार्च को दंतेवाड़ा में वकालत पढ़ी हुई नक्सली रेणुका मारी गई। वह संगठन की प्रेस टीम और कानूनी मामलों को देखती थी।
  • गजरला रवि (इनाम ₹40 लाख): ग्रेहाउंड्स फोर्स ने मारेडपल्ली मुठभेड़ में इस सेंट्रल कमेटी मेंबर को मार गिराया।
  • नीति उर्फ निर्मला (इनाम ₹40 लाख): नारायणपुर-दंतेवाड़ा सीमा पर पूर्वी बस्तर की इंचार्ज निर्मला का अंत हुआ।
  • राजे (हिड़मा की पत्नी): सुकमा मुठभेड़ में हिड़मा के साथ उसकी पत्नी राजे भी मारी गई, जो संगठन में सक्रिय सह-आरोपी थी।

डेडलाइन की ओर बढ़ते कदम

इन एनकाउंटर्स के बाद माओवादी संगठन में नेतृत्व का संकट पैदा हो गया है। बस्तर के वे इलाके जो कभी ‘नो-गो ज़ोन’ कहलाते थे, वहां अब सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित हो चुके हैं। 2025 की ये सफलताएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की दहलीज पर खड़ा है।



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