वन विभाग की चेतावनी के बाद भी जंगल में गए व्यक्ति को हाथियों ने कुचला, गाय खोजकर लौटते समय हुआ सामना

सूरजपुर जिले के रमकोला क्षेत्र के जंगल में हाथियों ने एक व्यक्ति को कुचलकर मार डाला। वन विभाग की ओर से रोके जाने और चेतावनी जारी करने के बाद भी मृतक अपने साथियों के साथ जंगल गए थे। मृतक अपनी खोई हुई गाय को लेकर लौट रहे थे, इस दौरान उनका समाना हाथियों से हो गया।
Publish Date: Sun, 23 Nov 2025 12:27:56 PM (IST)
Updated Date: Sun, 23 Nov 2025 12:37:33 PM (IST)
HighLights
- जंगल में हाथियों के हमले से एक व्यक्ति की मौत
- मवेशी की तलाश कर लौटते समय हुआ यह हादसा
- वनरक्षकों ने फोन पर जंगल में हाथियों की सूचना दी थी
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: सूरजपुर जिले के रमकोला से लगे जंगल में हाथियों के हमले से रमकोला पण्डोपारा निवासी सरफुद्दीन पिता मोहम्मद हबीब (55) की मौत हो गई। मृतक अपने साथियों के साथ मवेशी तलाश करने गया था। तभी हाथियों से उसका सामना हो गया। हाथियों के कुचलने से उसकी मौत हो गई।
मृतक सरफुद्दीन अपने साथियों सद्दाम, लालबाबू पण्डो, रतन पण्डो और अजमेर अली के साथ गुम हुई गाय एवं जड़ी–बूटी की तलाश में जंगल की ओर गया थे। सभी लोग मोटरसाइकिल से जंगल की तरफ बढ़ रहे थे कि तभी वन विभाग के सुरक्षाकर्मियों एवं वनरक्षकों ने फोन पर सूचना दी कि जंगल के भीतर हाथियों का दल सक्रिय है और आगे बढ़ रहा है। साथियों ने लौटने की सलाह दी, मगर सरफुद्दीन ने कहा कि गाय गुम हो गई है, पता लगाकर तुरंत लौट आते हैं।
अचानक हुआ हाथियों से सामना
गाय मिल जाने के बाद वापसी के दौरान कोदवारी जंगल के पास अचानक उनका सामना जंगली हाथियों से हो गया सभी लोग अपनी-अपनी बाइक छोड़कर जान बचाने भागे, लेकिन सरफुद्दीन पास की झाड़ियों में छिप गया। उनके साथी लगातार आवाज देते रहे, हाथी तुम्हारी तरफ जा रहा है, बाहर निकलो। लेकिन वह वहां से हट नहीं पाया और हाथियों ने उसे कुचल दिया।
घटना की सूचना मिलते ही गेम रेंजर अजय सोनी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे, बाकी साथियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। घटनास्थल के आसपास हाथियों की उपस्थिति के कारण मृतक के शव को बाहर नहीं निकाला जा सका था।
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बात मान लेते तो बच जाती जान
देर शाम खोजबीन के दौरान सरफुद्दीन का शव कोदवारी के पास मिला, इसके बाद सूचना रमकोला पुलिस को दी गई। वन विभाग, पुलिस टीम, ग्रामीणों और सरपंच प्रतिनिधि की उपस्थिति में रात लगभग 11:30 बजे शव को जंगल से निकाला गया। इस क्षेत्र के जंगलों में वर्ष भर हाथियों की उपस्थिति रहती है। वन अधिकारियों ने बताया कि यदि समझाइश को मान लिया जाता और सरफुद्दीन जंगल नहीं जाता तो शायद उसकी जान बच जाती।




