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विराट हिंदू सम्मेलन में मोहन भागवत बोले- अलगाव और भेदभाव को मन से निकालो…

दूसरी बात, जब व्यक्ति अकेला पड़ जाता है तो वह नशे जैसी बुराइयों में उलझ जाता है। आपसी संवाद और मित्रों के साथ बातचीत से इससे बचा जा सकता है। आज घरों में भी बातचीत कम हो गई है। इसलिए सप्ताह में एक दिन पूरा परिवार साथ बैठे, भजन करे, मां के हाथ का बना भोजन करे और तीन-चार घंटे आपसी गपशप करे। पूर्वजों की सीख आज के समय में कितनी प्रासंगिक है, इस पर चर्चा हो। आदेश देने के बजाय संवाद से सहमति बनाकर उसे घर में लागू करें।
15 अगस्त विज्ञापन




