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स्वामी विवेकानंद प्रतिमा के सामने सरगुजा युवक का संकल्प, न कोई संगठन, न कोई ताकत:हसदेव, रामगढ़ ‘मैनपाट बचाओ’

A young man from Surguja takes a pledge in front of Swami Vivekananda's statue: No organization, no power can stop us: Save Hasdeo, Ramgarh, and Mainpat!

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सरगुजा / 2 जनवरी 2026: नए साल के पहले ही दिन सरगुजा की पावन धरती पर पर्यावरण संरक्षण की एक अनोखी और प्रेरक मुहिम की शुरुआत हुई। घड़ी चौक स्थित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के सामने खड़े एक साधारण युवक उमाशंकर प्रसाद ने अपनी पत्नी गीता और दो साल की मासूम बेटी के साथ हाथों में तख्तियां थाम लीं। तख्तियों पर साफ लिखा था— “रामगढ़ बचाओ, हसदेव बचाओ, मैनपाट बचाओ।” न कोई बड़ा संगठन, न कोई राजनीतिक ताकत, न कोई आर्थिक सहारा। सिर्फ एक परिवार का दृढ़ संकल्प और प्रकृति के प्रति गहरा प्रेम। यह दृश्य न केवल सरगुजा के पर्यावरण प्रेमियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया।

उमाशंकर, जो अंबिकापुर के एक निजी होटल में महज 8 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करते हैं, ने बताया कि यह मुहिम उनकी लंबे समय की सोच का परिणाम है। “मैं रोज सुबह होटल जाते हुए हसदेव की हरियाली देखता हूं, जो कोयला खदानों की भेंट चढ़ रही है। रामगढ़ की प्राचीन गुफाएं और मैनपाट की ठंडी वादियां खतरे में हैं। मेरी बच्ची के भविष्य के लिए मैं चुप नहीं रह सकता,” उन्होंने भावुक स्वर में कहा। पत्नी गीता ने भी साथ दिया, “हमारे पास कुछ नहीं है, लेकिन संकल्प है। विवेकानंद जी कहते थे—उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो।”

सरगुजा के पर्यावरण संकट

सरगुजा संभाग, जो छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जिला है, अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। हसदेव अरण्य, जो एशिया का सबसे बड़ा सल वन क्षेत्र है, यहां का गौरव है। लेकिन पिछले दशक में कोयला ब्लॉकों की नीलामी और अवैध खनन ने इसे खतरे में डाल दिया। हसदेव में प्रस्तावित पारस धाम कोयला खदान परियोजना से 1.5 लाख पेड़ कटने का खतरा है। स्थानीय आदिवासी समुदाय सालों से ‘हसदेव अरण्य न बेचो’ का नारा लगाते आ रहे हैं।

रामगढ़, जो रामगढ़ झरना और प्रागैतिहासिक शैल चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, अब पर्यटन विकास के नाम पर विनाश की चपेट में है। मेनपाट को ‘छोटा तिब्बत’ कहा जाता है, लेकिन यहां अनियंत्रित निर्माण और प्लास्टिक कचरा इसे दूषित कर रहे हैं। सरगुजा जिला वन अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया, “हसदेव में 98 प्रतिशत वन क्षेत्र प्रभावित है। जलवायु परिवर्तन से सूखा बढ़ रहा है। ऐसे व्यक्तिगत प्रयास सराहनीय हैं।”

1 जनवरी दोपहर 12 बजे घड़ी चौक पर उमाशंकर परिवार पहुंचा। स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के नीचे खड़े होकर उन्होंने दो घंटे तक नारेबाजी की। राहगीरों ने वीडियो बनाए, जो फेसबुक और व्हाट्सएप पर फैल गए। स्थानीय युवा पत्रकार रवि तिवारी ने बताया, “मैंने पहली बार देखा कि बिना माइक के भी आवाज इतनी गूंजती है। 200 से ज्यादा लोग रुककर सुनते रहे।”

उमाशंकर ने कहा, “सरकार से अपील है कि हसदेव को बचाएं। रामगढ़ में प्लास्टिक बैन करें, मैनपाट को साफ रखें।” उनकी बेटी ने छोटे हाथों से तख्ती पकड़ी, जो दृश्य दिल छू गया। पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन होने पर कोई बाधा नहीं डाली।

यह मुहिम सरगुजा में चर्चा का विषय बन गई। कांग्रेस नेता नंद कुमार पटेल ने ट्वीट किया, “उमाशंकर जैसे युवा ही असली हीरो हैं। हसदेव बचाओ अभियान को समर्थन।” भाजपा के स्थानीय पार्षद श्यामलाल यादव ने कहा, “व्यक्तिगत स्तर पर जागरूकता जरूरी है। नगर निगम प्लास्टिक मुक्त अभियान चला रहा है।”

पर्यावरण कार्यकर्ता सुनीता यादव, जो हसदेव बचाओ आंदोलन से जुड़ी हैं, ने सराहना की: “यह संगठन-रहित प्रयास नई मिसाल है। हम उमाशंकर से मिलेंगे।” सोशल मीडिया पर #हसदेवबचाओ #सरगुजापर्यावरण हैशटैग ट्रेंड करने लगा। रायपुर से एक एनजीओ ने संपर्क साधा।

हसदेव, रामगढ़ और मैनपाट के खतरे

हसदेव अरण्य: 1,70,000 हेक्टेयर में फैला यह जंगल बाघ, हाथी और 200 से ज्यादा पक्षियों का घर है। कोयला खदान से विस्थापन का डर। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने खनन पर रोक लगाई, लेकिन चुनौतियां बरकरार।

रामगढ़: प्रागैतिहासिक गुफा चित्र यूनेस्को सूची में हैं। लेकिन अवैध खनन और कचरा बाढ़ ला रहा है। पर्यटन बढ़ने से पारिस्थितिकी असंतुलन।

मैनपाट: 3500 फीट ऊंचाई पर स्थित, यहां बौद्ध मठ और घास के मैदान हैं। प्लास्टिक और वाहनों से प्रदूषण बढ़ा। स्थानीय पोंगेशिया निवासी कहते हैं, “पर्यटक आते हैं, लेकिन सफाई नहीं करते।”

विशेषज्ञ डॉ. अनिल शुक्ला, आईआईटी रायपुर, ने कहा, “सरगुजा का 42 प्रतिशत क्षेत्र वन है। लेकिन खनन से कार्बन उत्सर्जन 20 प्रतिशत बढ़ सकता है। व्यक्तिगत मुहिमें बड़े बदलाव लाती हैं।”

उमाशंकर का व्यक्तिगत संघर्ष

उमाशंकर (28) का जन्म सरगुजा के ग्रामीण इलाके में हुआ। 10वीं पास करने के बाद होटल में नौकरी। “रोज 12 घंटे काम, लेकिन पर्यावरण चिंता नहीं छोड़ता। रविवार को जंगल साफ करता हूं,” उन्होंने कहा। गीता घर संभालती हैं। परिवार गरीब, लेकिन संकल्प अमीर।

उमाशंकर ने कहा, “हर शनिवार घड़ी चौक पर धरना दूंगा। स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाऊंगा।” स्थानीय प्रशासन से अपील की कि हसदेव सर्वे कराएं। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि मुद्दे सुने जाएंगे।

प्रभाव और प्रेरणा

यह घटना सरगुजा में पर्यावरण जागरूकता की लहर ला रही है। युवा ग्रुप बन रहे हैं। एक सर्वे में 70 प्रतिशत लोगों ने समर्थन जताया। यह साबित करता है कि बदलाव बड़े संगठनों से नहीं, व्यक्तिगत इच्छाशक्ति से आता है।

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