सूरजपुर में कलयुगी नाना ने नशे में रिश्तों को किया तार-तार, 3 वर्षीय मासूम के साथ की हैवानियत

घटना शुक्रवार सुबह की बताई जा रही है, जब मासूम अपनी नानी और मां की गैरमौजूदगी में घर पर अपने 50 वर्षीय नाना के साथ थी। आरोप है कि नशे में धुत आरोपित न …और पढ़ें
HighLights
- मासूम अपनी नानी और मां की गैरमौजूदगी में घर पर अपने 50 वर्षीय नाना के साथ थी।
- आरोप है कि नशे में धुत आरोपित ने अपनी ही नातिन को दरिंदगी का शिकार बना डाला।
- इस घटना की जानकारी मिलते ही गांव में आक्रोश फैल गया और ग्रामीण स्तब्ध रह गए।
नईदुनिया न्यूज, बिश्रामपुर। सूरजपुर जिले के भटगांव थाना क्षेत्र के एक गांव में सामने आई तीन वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना ने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया है, बल्कि पारिवारिक सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करते हुए कलियुगी नाना द्वारा की गई इस हैवानियत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
घटना शुक्रवार सुबह की बताई जा रही है, जब मासूम अपनी नानी और मां की गैरमौजूदगी में घर पर अपने 50 वर्षीय नाना के साथ थी। आरोप है कि नशे में धुत आरोपित ने अपनी ही नातिन को दरिंदगी का शिकार बना डाला। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में आक्रोश फैल गया और ग्रामीण स्तब्ध रह गए।
पीड़िता के परिजनों द्वारा मामले की रिपोर्ट भटगांव थाने में दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपित नाना 50 वर्ष को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित इलाके में चौकीदारी का काम करता था।
पुलिस ने आरोपित के खिलाफ बीएनएस की धारा 65(2) एवं पाक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
वहीं, पीड़ित मासूम को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, जहां उसकी देखभाल और काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है।
एक्सपर्ट व्यू:
- विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ती नशाखोरी और पारिवारिक निगरानी की कमी का खतरनाक संकेत हैं।
- मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चों के साथ होने वाले अधिकांश यौन अपराध परिचितों या रिश्तेदारों द्वारा ही किए जाते हैं, जो इस मामले को और गंभीर बनाता है।
- बाल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है, खासकर तब जब वे किसी भी परिस्थिति में बच्चे को अकेला छोड़ते हैं।
- साथ ही, गांव-समाज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर ऐसे अपराधों के खिलाफ सामूहिक निगरानी और त्वरित सूचना तंत्र विकसित करना जरूरी है।




