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सोने की चमक और तेज: जनवरी-मार्च तिमाही में वैश्विक मांग 2% बढ़ी, WGC ने कहा- रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद मांग बढ़ी

15 अगस्त विज्ञापन


भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने के आकर्षण के चलते वैश्विक स्तर पर इसकी मांग में बड़ा उछाल देखने को मिला है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में सोने की कुल वैश्विक मांग सालाना आधार पर 2 प्रतिशत बढ़कर 1,231 टन हो गई है। साल 2025 की इसी तिमाही में यह मांग 1,205 टन दर्ज की गई थी।

मूल्य और कीमतों में ऐतिहासिक उछाल

भले ही मांग की कुल मात्रा में मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन सोने की मांग का मूल्य सालाना आधार पर 74 प्रतिशत बढ़कर 193 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान सोने की औसत कीमत 81 प्रतिशत उछलकर 4,873 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि 2025 की समान अवधि में यह 2,860 डॉलर प्रति औंस थी। डब्ल्यूजीसी की वरिष्ठ बाजार विश्लेषक लुईस स्ट्रीट के अनुसार, वर्ष 2026 में सोने की अस्थिरता काफी बढ़ गई है, और जनवरी में इसकी कीमत 5,400 डॉलर प्रति औंस के उच्चतम स्तर को भी पार कर गई थी।

बार और सिक्कों में निवेश बढ़ा, आभूषणों की मांग घटी

इस तिमाही में सोने के बार (छड़) और सिक्कों के निवेश में 42 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया, जो कुल 474 टन रहा। डब्ल्यूजीसी के क्षेत्रीय सीईओ (भारत) सचिन जैन ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव ने दुनिया भर के खुदरा निवेशकों को सोने की कीमतों की गति और सुरक्षित निवेश की अपील की ओर आकर्षित किया है।

प्रमुख क्षेत्रीय और सेक्टोरल आंकड़े:

चीन और अन्य बाजार: चीन में बार और सिक्कों की मांग सालाना आधार पर 67 प्रतिशत बढ़कर 207 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। भारत, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ-साथ अमेरिका (14%) और यूरोप (50%) में भी इनकी खरीदारी में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।

आभूषण बाजार पर असर: ऊंची कीमतों के दबाव में सोने के आभूषणों की कुल मांग सालाना आधार पर 23 प्रतिशत गिरकर 300 टन रह गई। इस दौरान चीन में 32 प्रतिशत, मध्य पूर्व में 23 प्रतिशत और भारत में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

मूल्य में वृद्धि: मात्रा में गिरावट के बावजूद, मूल्य के लिहाज से आभूषणों की मांग में वृद्धि हुई है, जो रिकॉर्ड कीमतों के बाद भी उपभोक्ताओं की सोने पर खर्च करने की इच्छा को दर्शाता है। सचिन जैन ने बताया कि चीन और भारत जैसे बाजारों में आभूषणों की कुछ खपत अब बार और सिक्कों की मांग में बदल गई है, जिसे एक वैकल्पिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है।

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और कुल आपूर्ति

जनवरी-मार्च तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने भी मांग को समर्थन देते हुए अपने वैश्विक भंडार में 244 टन सोना जोड़ा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी इस तिमाही के दौरान 300 किलोग्राम सोने की ताजा खरीदारी की है। वहीं, तुर्की, रूस और अज़रबैजान के केंद्रीय बैंकों द्वारा कुछ बिकवाली भी की गई। भौतिक रूप से समर्थित गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग्स में भी 62 टन की वृद्धि हुई, जिसमें एशियाई फंडों (84 टन) का बड़ा योगदान रहा, जबकि मार्च में अमेरिकी फंडों से निकासी देखी गई। आपूर्ति के मोर्चे पर, खदान उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहा और रिसाइकलिंग में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे कुल वैश्विक आपूर्ति 2 प्रतिशत बढ़कर 1,231 टन हो गई।

आगे का आउटलुक

लुईस स्ट्रीट के अनुसार, भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते विशेषकर एशिया में निवेश की मांग आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिमी देशों में लंबी अवधि तक उच्च ब्याज दरें बाजार के लिए कुछ चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं। आपूर्ति पक्ष में खदान उत्पादन में मामूली वृद्धि की उम्मीद है, लेकिन संभावित ऊर्जा संकट इस आउटलुक को प्रभावित कर सकता है।

 

 



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