
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भटगांव थाना क्षेत्र के कपसरा स्थित बिसाही पोड़ी गांव में 28 नवंबर की देर रात एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। खलिहान में धान की रखवाली के लिए चारपाई डालकर सो रहे कबिलास राजवाड़े (42 वर्ष) और उनकी पत्नी धनियारो राजवाड़े (38 वर्ष) पर अचानक एक दंतैल हाथी ने हमला कर दिया। हाथी ने उनकी चारपाई को सूंड से उखाड़ फेंका और फिर दोनों को पैरों तले कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
दंपती ने दिन भर खेत में मेहनत करने के बाद धान की फसल की सुरक्षा के लिए खलिहान में ही रुकने का फैसला किया था। रात करीब 2 बजे प्रतापपुर वन परिक्षेत्र से भटकते हुए सूरजपुर वन परिक्षेत्र में घुसा यह हाथी खलिहान तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, दंपती ने शोर मचाया और भागने की कोशिश की, लेकिन हाथी की तेज रफ्तार ने उन्हें संभलने का मौका ही नहीं दिया। सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर गए तो क्षत-विक्षत शव मिले, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस और वन विभाग की टीमों ने तुरंत पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया तथा पंचनामा किया।
मृतक परिवार का दर्द
कबिलास और धनियारो के तीन बच्चे हैं, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है। परिवार के अन्य सदस्यों पर यह घटना भारी पड़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि दंपती गरीब किसान थे, जो अपनी फसल की रक्षा के लिए रात-दिन जूझते थे। इस घटना ने परिवार को आर्थिक और भावनात्मक रूप से तोड़ दिया है। प्रशासन ने मृतक परिवार को तत्काल 4-4 लाख रुपये की अनुमोदित सहायता राशि देने की घोषणा की है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कोई मुआवजा उनकी जान की भरपाई नहीं कर सकता।
हाथियों का बढ़ता आतंक
सूरजपुर और आसपास के जिलों में हाथियों का उपद्रव पिछले कुछ वर्षों से चरम पर है। जंगलों में चारे की कमी के कारण हाथी दल-बदल कर मानव बस्तियों में घुस आते हैं। धान की फसल कटाई के मौसम में खलिहानों पर हमले बढ़ जाते हैं। हाल ही में ही चार जिलों में हाथियों ने चार लोगों की जान ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि वन क्षेत्र सिकुड़ने और जलवायु परिवर्तन से हाथी भटक रहे हैं। सूरजपुर में पहले भी किसानों, महिलाओं और बच्चों पर हाथी हमले दर्ज हो चुके हैं।
घटना के बाद गांव वालों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि लाखों रुपये मॉनिटरिंग और ट्रेनिंग पर खर्च होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते। हाथियों की लोकेशन ट्रैक करने वाले उपकरण और ड्रोन का इस्तेमाल अपर्याप्त है। ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया तथा हाथी दल को जंगल में खदेड़ने की मांग की। वन अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने तथा रात में खेतों पर न जाने की सलाह दी है।
वन विभाग ने हाथी दल की तलाश तेज कर दी है तथा हेलीकॉप्टर और ड्रोन से निगरानी शुरू की है। दीवारें, सोलर फेंसिंग और डाक्यूमेंट्री फिल्में दिखाकर हाथियों को भगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अनियमित आपूर्ति और संसाधनों की कमी से ये उपाय सीमित साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञ सुझाते हैं कि वन और बस्तियों के बीच बफर जोन बनाया जाए, चारा बैंक स्थापित किए जाएं तथा किसानों को बीमा कवर दिया जाए। केंद्र सरकार ने भी मानव-वन्यजीव संघर्ष के लिए नई योजना शुरू की है।
यह घटना सूरजपुर के कपसरा, बिसाही पोड़ी जैसे गांवों में दहशत पैदा कर रही है। किसान अब रात में खेतों पर जाने से डर रहे हैं, जिससे फसल सुरक्षा प्रभावित हो रही है। स्थानीय विधायक और कलेक्टर ने घटनास्थल का दौरा कर आश्वासन दिया है। लेकिन ग्रामीणों का विश्वास बहाल करने के लिए त्वरित कार्रवाई जरूरी है। यह मामला छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वन्यजीव प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर करता है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी घटनाएं बढ़ेंगी।
जिला प्रशासन ने वन विभाग के साथ संयुक्त बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी मामले का संज्ञान लिया तथा पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। पुलिस ने भटगांव थाने पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है जो हाथी के व्यवहार का अध्ययन करेगी। ग्रामीणों को हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।




