
सूरजपुर : सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम भेड़िया अंतर्गत आमापारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 1 में 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण नहीं हो सका। ग्रामीणों के अनुसार, केंद्र की कार्यकर्ता और सहायिका दोनों ही अनुपस्थित रहीं, जिससे राष्ट्रीय पर्व की धूमधाम से मनाने की परंपरा टूट गई। यह लापरवाही स्थानीय बच्चों और महिलाओं के बीच चर्चा का विषय बनी।
आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र होता है। ऐसे में राष्ट्रीय उत्सव पर कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने विभागीय उदासीनता को उजागर किया। ग्रामीणों ने इसे गंभीर उल्लंघन बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग उठाई।
घटना की सूचना मिलते ही आमापारा के ग्रामीणों ने आंगनबाड़ी केंद्र पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने केंद्र में प्रवेश किया और खालीपन देखकर एक हस्ताक्षरयुक्त पंचनामा तैयार किया। इस पंचनामे में कार्यकर्ता और सहायिका के नाम, अनुपस्थिति का समय और केंद्र की स्थिति दर्ज की गई। लगभग 20-25 ग्रामीणों ने अपने हस्ताक्षर से इसे प्रमाणित किया।
ग्रामीण नेता रामेश्वर सिंह ने बताया कि यह केंद्र 50 से अधिक बच्चों को सेवाएं प्रदान करता है। गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण न होने से बच्चों को राष्ट्रीय गान गाने और तिरंगा फहराने का अवसर नहीं मिला। पंचनामा महिला एवं बाल विकास विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।
विभागीय नियमों का उल्लंघन
महिला एवं बाल विकास विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार, सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर राष्ट्रीय पर्वों पर ध्वजारोहण अनिवार्य है। केंद्र प्रमुख को कम से कम तिरंगा फहराना, राष्ट्रीय गान गाना और बच्चों को संविधान के मूल्यों के प्रति जागरूक करना होता है। प्रतापपुर परियोजना अधिकारी को निर्देश हैं कि वे स्वयं या प्रतिनिधि भेजकर कार्यक्रम आयोजित करवाएं।
इस मामले में कार्यकर्ता की अनुपस्थिति अनुशासनहीनता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने आंगनबाड़ी कर्मचारियों के लिए उपस्थिति ऐप अनिवार्य किया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसकी पालना ढीली रहती है। सूरजपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले में यह समस्या आम है।
आमापारा और भेड़िया के निवासियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर आक्रोश जताया। एक ग्रामीण ने कहा, “देशभक्ति सिखाने वाले केंद्र पर ही तिरंगा नहीं फहराया गया, यह शर्मनाक है।” विपक्षी संगठनों ने इसे विभागीय विफलता करार दिया। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर से जांच की मांग की।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सूरजपुर जिला कार्यालय ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। प्रतापपुर बीईओ ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है और जांच शुरू हो गई।
सूरजपुर जिला सूरगुजा संभाग का हिस्सा है, जहां 500 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। प्रतापपुर ब्लॉक में 100 से ज्यादा केंद्र हैं, जो ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा हैं। गत वर्ष भी कुछ केंद्रों पर समान शिकायतें आईं, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यह घटना विभाग को सतर्क कर सकती है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मासिक 10,000 रुपये मानदेय मिलता है, जिसमें राष्ट्रीय कर्तव्यों का निर्वहन शामिल है। अनुपस्थिति पर वेतन कटौती और निलंबन के प्रावधान हैं।
पंचनामा के आधार पर परियोजना अधिकारी जांच करेंगे। दोषी पाए जाने पर कार्यकर्ता को नोटिस जारी हो सकता है। जिला कलेक्टर ने सभी बीडीओ को निर्देश दिए हैं कि वे केंद्रों का औचक निरीक्षण करें। ग्रामीणों ने एसडीएम प्रतापपुर से मिलने का समय मांगा है।
यह घटना आंगनबाड़ी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता दर्शाती है। विभाग ने डिजिटल उपस्थिति और सीसीटीवी लगाने की योजना बनाई है। सूरजपुर में गणतंत्र दिवस अन्यत्र धूमधाम से मनाया गया, जो इस चूक को और उजागर करता है।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कर्मचारी अक्सर अन्य कामों में व्यस्त रहते हैं। भेड़िया जैसे दूरस्थ गांवों में परिवहन और जागरूकता की कमी है। सरकार ने 2026 तक सभी केंद्रों को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा है।





