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शिक्षा विभाग ने सेजेस स्कूलों के प्रभारी प्राचार्यों को उनके मूल पदों पर वापस भेजने का कड़ा आदेश जारी किया

शिक्षा विभाग ने सेजेस स्कूलों के प्रभारी प्राचार्यों को उनके मूल पदों पर वापस भेजने का कड़ा आदेश जारी किया

15 अगस्त विज्ञापन

गौरीशंकर गुप्ता/छत्तीसगढ़ :  छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग (SCERT) ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों (सेजेस) में प्रतिनियुक्त प्रभारी प्राचार्यों को उनके मूल पदों पर तत्काल वापस भेजने का कड़ा आदेश जारी किया है। यह निर्णय 12 मार्च 2026 को जारी परिपत्र के माध्यम से लिया गया। सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को अनुपालन सुनिश्चित करने और 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।​

सेजेस स्कूलों की शुरुआत 2021 में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा की गई थी, जिनमें अब 300 से अधिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें अधिकांश प्रभारी प्राचार्य व्याख्याता स्तर के अधिकारी थे, जिन्हें बिना पदोन्नति के प्राचार्य पद पर प्रतिनियुक्त किया गया। हालिया पदोन्नति प्रक्रिया में ट्राइबल और एजुकेशन कार्डर के प्राचार्यों ने आपत्ति दर्ज की। उन्होंने तर्क दिया कि व्याख्याता प्रभारी प्राचार्य पद पर स्थायी नहीं रह सकते। शासन ने नवंबर 2025 में सभी सेजेस स्कूलों के प्रभारी प्राचार्यों का मूल पद, प्रतिनियुक्ति तिथि और विषयवार जानकारी मांगी थी।​

आदेश के अनुसार, सभी प्रभारी प्राचार्य 72 घंटे के भीतर अपने मूल स्कूल/कार्यालय में जॉइन करेंगे। जिला कलेक्टरों को विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया। गैर-अनुपालन पर विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। पदोन्नत प्राचार्यों की काउंसलिंग में सेजेस स्कूलों के पद रिक्त माने जाएंगे। यह व्यवस्था 17-19 नवंबर 2025 के दावा-आपत्ति के बाद तय की गई।

इससे सेजेस स्कूलों में 250 से अधिक प्राचार्य पद रिक्त हो सकते हैं। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने आदेश का स्वागत किया, कहा कि इससे पारदर्शिता आएगी। हालांकि, कुछ संगठनों ने अस्थायी व्यवस्था पर चिंता जताई। विभाग ने आश्वासन दिया कि शिक्षण कार्य प्रभावित नहीं होगा। नए प्राचार्यों की चयन प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू होगी।

शिक्षा विभाग अब सेजेस स्कूलों में स्थायी प्राचार्य व्यवस्था के लिए विशेष भर्ती पर विचार कर रहा। ऑनलाइन काउंसलिंग पोर्टल पर पदों की सूची अपलोड होगी। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को प्राथमिकता मिलेगी। यह कदम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के शिक्षा सुधार एजेंडे का हिस्सा है।

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