
गौरीशंकर गुप्ता/सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के धान के कटोरे में इस वक्त सिर्फ फसल की खुशबू नहीं, बल्कि विवादों और हिंसा का धुआं भी उठ रहा है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कोसीर थाना क्षेत्र के लेन्ध्रा (छोटे) धान उपार्जन केंद्र में 30 और 31 दिसंबर की रात जो कुछ भी हुआ, उसने प्रशासन से लेकर मीडिया जगत तक हड़कंप मचा दिया है। यहां एक ही रात में दो ऐसी कहानियां लिखी गईं, जो एक-दूसरे के बिल्कुल उलट हैं।
*पर्दाफाश की कोशिश या जानलेवा हमला? -*
नेशनल टीवी चैनल IND-24 के संवाददाता केशव वैष्णव और उनके साथी कमल सिंह यादव के अनुसार, वे भ्रष्टाचार की उस जड़ को खोदने गए थे, जिसकी शिकायत उन्हें कई दिनों से किसानों से मिल रही थी।
*पत्रकारों का सनसनीखेज आरोप:) :*
* ‘सेटिंग’ का खेल: पत्रकारों का दावा है कि मंडी में छोटे किसानों का धान 41.500 किलो तौला जा रहा था, जबकि रसूखदारों और नेताओं का धान सीधे घरों से ‘छल्ली’ (बिना तौल के स्टॉक) किया जा रहा था।
* अंधेरे का फायदा: जैसे ही पत्रकारों ने इस अनियमितता को कैमरे में कैद करना चाहा, वहां की लाइटें बंद कर दी गईं।
* खूनी तांडव:
शिकायत के मुताबिक, फड़ प्रभारी मोहर लाल साहू ने 20-25 कथित गुंडों को बुलाया। पत्रकारों को लात-घूंसों से पीटा गया, उनके मोबाइल और पर्स लूट लिए गए और उन पर पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाने की कोशिश की गई। फिलहाल पत्रकार की सुनने की क्षमता प्रभावित होने और शरीर पर गंभीर चोटों की बात सामने आ रही है।
*दूसरा पहलू : पत्रकारिता के नाम पर ‘चौथ वसूली’? -*
वहीं दूसरी तरफ, मंडी प्रभारी मोहर कुमार साहू ने पूरी घटना को अलग ही रंग दिया है। उन्होंने पुलिस को दिए आवेदन में कहा है कि पत्रकारिता का धौंस दिखाकर उन्हें बदनाम करने की धमकी दी गई।
मंडी प्रबंधन का आरोप:
* 20,000 की मांग : प्रभारी का दावा है कि पत्रकारों ने काम रोकने के बदले 20 हजार रुपये की मांग की।
* शासकीय कार्य में बाधा : आरोप है कि पत्रकार बिना अनुमति के केंद्र में घुसे और वहां के कर्मचारियों को डराकर सरकारी काम में रुकावट पैदा की।
*कानूनी शिकंजा :
BNS की धाराओं के तहत क्रॉस FIR -*कोसीर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों पर नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया है:
* FIR No. 0261 (पत्रकार की शिकायत पर): धारा 296 (अश्लीलता), 115(2) (चोट पहुंचाना), 351(2) (धमकी) और 3(5) (साझा इरादा)।
* FIR No. 0262 (मंडी प्रभारी की शिकायत पर): धारा 308(2) (वसूली), 221 (लोक सेवक के काम में बाधा) और 3(5)।
अनसुलझे सवाल: जांच की सुई किस ओर?
यह मामला छत्तीसगढ़ के धान खरीदी सीजन की सबसे बड़ी ‘क्राइम थ्रिलर’ बन चुका है। जनता के मन में कई तीखे सवाल हैं :
* साक्ष्य कहां हैं? अगर पत्रकारों ने भ्रष्टाचार का वीडियो बनाया था, तो उनके मोबाइल फोन अब कहां हैं? क्या उन्हें गायब कर दिया गया?
* अंधेरे की साजिश:
रात 7 बजे मंडी की लाइट बंद होना और अचानक 20-25 लोगों का इकट्ठा हो जाना किसी सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है या केवल इत्तेफाक?
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किसानों की चुप्पी:
क्या डर के मारे किसान उस रात का सच बोलने से कतरा रहे हैं?
सारंगढ़ पुलिस के लिए यह मामला साख की लड़ाई बन गया है। एक तरफ ‘प्रेस की आजादी’ का सवाल है, तो दूसरी तरफ ‘शासकीय कर्मचारी की सुरक्षा’। अगर पत्रकारों पर हमला हुआ है, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने की कोशिश है। और यदि पत्रकारिता की आड़ में वसूली हुई है, तो यह इस पवित्र पेशे पर काला धब्बा है। सच अब केवल पुलिस की निष्पक्ष जांच और छीने गए मोबाइल फोन्स की CDR (Call Detail Records) से ही बाहर आ पाएगा।




