छत्तीसगढ़

सात फेरे नहीं हुए तो शादी शून्य? हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज की

15 अगस्त विज्ञापन

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी को अमान्य घोषित करने की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। मामला जांजगीर-चांपा जिले के राहौद के एक युवक और युवती से जुड़ा है, जिन्होंने 3 फरवरी 2022 को मंदिर में शादी की थी। युवक ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की थी, लेकिन फैमिली कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद युवक ने हाईकोर्ट में अपील की।

हाईकोर्ट में जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। बेंच ने कहा कि सिर्फ शादी की रस्में पूरी नहीं होने से विवाह को अमान्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 में शादी को अमान्य घोषित करने के कुछ तय आधार हैं और केवल रस्मों को लेकर विवाद होने पर शादी को शून्य घोषित नहीं किया जा सकता।

मामले के अनुसार, राहौद के युवक और युवती की पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए और उन्होंने शादी करने का फैसला किया। जब युवक युवती के परिवार वालों से मिला, तो उसने कहा कि वह पहले अपने परिवार की सहमति लेगा। इसके बाद दोनों ने 3 फरवरी 2022 को मंदिर में शादी कर ली और शादी से जुड़े दस्तावेज भी बनवा लिए।

कुछ समय बाद दोनों के बीच मनमुटाव होने लगा, जिसके बाद युवक ने शादी को मानने से इनकार कर दिया। युवक का आरोप था कि युवती ने उसे अपने घर बुलाया और शादी करने के लिए दबाव बनाया। उसने यह भी आरोप लगाया कि आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर शादी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। युवक का कहना था कि चिरमिरी के शिव मंदिर में जल्दबाजी में शादी करा दी गई और शादी के दौरान सात फेरे भी नहीं हुए थे।

युवक ने दावा किया कि शादी के दौरान हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अग्नि के सामने सात फेरे लेने की रस्म नहीं हुई थी। इसी आधार पर उसने शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की। दूसरी ओर, युवती ने युवक के आरोपों को गलत बताया। उसका कहना था कि शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी और शादी के बाद युवक ने उसे पत्नी के रूप में स्वीकार भी किया। दोनों करीब डेढ़ महीने तक साथ रहे। युवती ने आरोप लगाया कि युवक भरण-पोषण देने से बचने के लिए शादी को अमान्य घोषित कराने की कोशिश कर रहा है।

फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और सबूत देखने के बाद युवक की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि सिर्फ सात फेरे नहीं होने से शादी को अमान्य घोषित नहीं किया जा सकता। इसके बाद युवक ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5, 7 और 11 पर विचार किया।

कोर्ट ने बताया कि धारा 7 के तहत हिंदू विवाह संबंधित लोगों के रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार होता है। अगर उन रीति-रिवाजों में सात फेरे या अग्नि के सामने सात कदम लेने की रस्म शामिल है, तो सातवां कदम लेने के बाद ही विवाह पूरा माना जाता है। हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने मामले के कानूनी पहलुओं पर ध्यान देने के बजाय शादी की रस्मों और उसकी वैधता पर फैसला दिया था, जबकि धारा 11 के तहत यह देखना जरूरी था कि शादी में धारा 5 की शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

इस कानूनी गलती के कारण हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। हालांकि, इससे युवक को शादी को अमान्य घोषित कराने में कोई राहत नहीं मिली और उसकी याचिका खारिज कर दी गई। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त किया, लेकिन पति की मूल याचिका भी खारिज कर दी।

15 अगस्त विज्ञापन
विज्ञापन 1
विज्ञापन 2
विज्ञापन 3
विज्ञापन 4
विज्ञापन 5
विज्ञापन 6
विज्ञापन 7
विज्ञापन 8

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!